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प्रश्न
चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए। कैसे लिखें
- हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
- दृश्य का क्रम-बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी।
(संकेत- चित्र 4: "अब हम आजाद हैं।")

लेखन कौशल
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उत्तर
| हीरा और मोती काँजीहाउस में कई पशुओं के साथ बंद थे। सभी पशु भूख, प्यास और दुख से परेशान थे। वहाँ का वातावरण उदासी और असहायता से भरा हुआ था। | |
| मोती: | “हीरा, यहाँ तो सब पशु बहुत दुखी हैं। न ठीक से चारा मिल रहा है, न पानी। अगर हम यहीं पड़े रहे, तो सबकी हालत और खराब हो जाएगी।” |
| हीरा: | “तुम ठीक कह रहे हो, मोती। हमें धैर्य से काम लेकर यहाँ से निकलने का कोई उपाय सोचना होगा।” |
| हीरा और मोती ने काँजीहाउस की दीवार तोड़कर बाहर निकलने की योजना बनाई। उन्होंने सोचा कि यदि वे साहस और एकता से काम करें, तो अपने साथ दूसरे पशुओं को भी मुक्त करा सकते हैं। | |
| हीरा: | “मोती, देखो, यह दीवार कुछ कमजोर लग रही है। यदि हम दोनों मिलकर पूरी ताकत लगाएँ, तो इसे तोड़ा जा सकता है।” |
| मोती: | “हाँ हीरा, हम हार नहीं मानेंगे। अपनी आज़ादी के साथ-साथ इन दूसरे पशुओं को भी यहाँ से छुड़ाएँगे।” |
| दोनों बैलों ने अपने सींगों से दीवार पर बार-बार जोरदार प्रहार किया। काफी मेहनत के बाद दीवार टूटने लगी और बाहर निकलने का रास्ता बन गया। | |
| मोती: | “जोर लगाओ हीरा, अब दीवार ज्यादा देर टिक नहीं पाएगी!” |
| हीरा: | “हाँ मोती, पूरी शक्ति लगा दो। बस थोड़ी-सी और कोशिश, फिर हम सब इस कैद से बाहर होंगे!” |
| दीवार टूटते ही बंद पशु तेजी से बाहर भागने लगे। सबके मन में खुशी भर गई, क्योंकि उन्हें बंदी जीवन से मुक्ति मिल गई थी। | |
| हीरा: | “जल्दी बाहर निकलो, अब तुम सब आजाद हो! डरने की जरूरत नहीं है।” |
| मोती: | “आज हमें अपनी मेहनत का फल मिल गया। चलो, सब मिलकर खुली हवा में स्वतंत्र जीवन की ओर बढ़ें!” |
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