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प्रश्न
चौड़े मुँह वाली काँच की तीन बोतलें लीजिए। उन पर A, B तथा C का चिह्न लगाइए। बोतल A को सामान्य नल के पानीं से लगभग आधा भर लीजिए। बोतल B को उसी स्तर तक कुछ मिनट तक उबाले हुए जल से भर लीजिए, जहाँ तक बोतल A को भरा था। बोतल C में उसी उबले हुए जल को उसी मात्रा में लीजिए, जितनी अन्य बोतलों में ली थी। प्रत्येक बोतल में लोहे की एक जैसी कुछ कीलों को डाल दीजिए, ताकि वे पूरी तरह से पानी में डूबी रहें। बोतल C के जल में एक चम्मच खाना पकाने का तेल डाल दें, ताकि पानी के ऊपर उसकी एक परत बन जाए। बोतलों को कुछ दिनों तक ऐसे ही रखा रहने दें। प्रत्येक बोतल में से कीलों को निकालकर उनका अवलोकन करें। अपनें प्रेक्षणों का कारण समझाएँ।
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उत्तर
प्रेक्षण और व्याख्या:
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बोतल A (नल का पानी):
- प्रेक्षण: बोतल A में लोहे की कीलें जंग लगी हुई दिखेंगी।
- व्याख्या: नल के पानी में घुली हुई ऑक्सीजन होती है, जो लोहे के साथ प्रतिक्रिया करके जंग उत्पन्न करती है।
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बोतल B (उबला हुआ पानी):
- प्रेक्षण: बोतल B में लोहे की कीलों पर बहुत कम या बिल्कुल जंग नहीं लगेगी।
- व्याख्या: उबले हुए पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
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बोतल C (उबला हुआ पानी और तेल):
- प्रेक्षण: बोतल C में लोहे की कीलों पर कोई जंग नहीं लगेगी।
- व्याख्या: तेल की परत पानी में ऑक्सीजन के प्रवेश को रोकती है, जिससे जंग नहीं लगती।
निष्कर्ष: लोहे की कीलों में जंग लगना पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण होता है। उबला हुआ पानी ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है, और तेल की परत ऑक्सीजन के संपर्क को पूरी तरह से रोक देती है, जिससे जंग नहीं लगती।
