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‘बुजुर्ग आदर-सम्‍मान के पात्र होते हैं, दया के नहीं ’ इस सुवचन पर अपने विचार लिखिए। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

‘बुजुर्ग आदर-सम्‍मान के पात्र होते हैं, दया के नहीं ’ इस सुवचन पर अपने विचार लिखिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

 हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि आज जो व्यक्ति बुजुर्ग है वह हमेशा बूढ़ा और असहाय नहीं था। वह भी पहले युवा था। उसने अपने परिवार का पालन-पोषण और उसकी देखरेख की थी। उसने तरह-तरह की समस्याओं का सामना किया था और उन्हें अपने तरीके से हल किया था। उसे जीवन जीने का अनुभव है। लेकिन वृद्ध हो जाने पर किसी-किसी परिवार में बुजुर्गों को किनारे कर दिया जाता है। उनकी सलाह या सुझाव को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता। इस तरह के व्यवहार से बुजुर्गों को अपने सम्मान पर ठेस लगती महसूस होती है। किसी-किसी परिवार में तो बुजुर्गों के खाने-पीने की भी किसी को चिंता नहीं रहती। घर के लोग अपने में मगन रहते हैं और बुजुर्गों का कोई ख्याल नहीं रखता। बुजुर्गों को खाने-पीने के लिए उनका मुँह ताकना पड़ता है। हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि हम इन बुजुगों की संतान हैं । उनको पर्याप्त सम्मान देना और उनकी हर प्रकार से देखरेख करना हमारा फर्ज है। बुजुर्गों की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद से ही परिवार फूलता-पे- फूलता और खुशहाल रहता है। इसलिए बुजुर्गों को हमें सदा आदर-सम्मान देना चाहिए और उनकी देखरेख करनी चाहिए।

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बूढ़ी काकी
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अध्याय 2.1: बूढ़ी काकी (पूरक पठन) - अभिव्यक्ति [पृष्ठ ९५]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Lokbharati [English] Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 2.1 बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
अभिव्यक्ति | Q (१) | पृष्ठ ९५

संबंधित प्रश्न

स्‍वभाव के आधार पर पात्र का नाम
१. क्रोधी - ______
२. लालची - ______
३. शरारती - ______
४. स्‍नेहिल - ______

कृति पूर्ण कीजिए:


बुद्धिराम का काकी के प्रति दुर्व्यवहार दर्शाने वाली चार बातें:

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

कारण लिखिए :

बूढ़ी काकी ने भतीजे के नाम सारी संपत्‍ति लिख दी


कारण लिखिए :

लाड़ली ने पूड़ियाँ छिपाकर रखीं


कारण लिखिए :

बुद्‌धिराम ने काकी को अँधेरी कोठरी में धम से पटक दिया


कारण लिखिए :

अंग्रेजी पढ़े नवयुवक उदासीन थे


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रात का समय था। बुद्धिराम के द्वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे।

आज बुद्धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्सव था। घर के भीतर स्त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्त थी। भट्टियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थीं। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

(1) एक-दो शब्दों में उत्तर लिखिए: (2)

  1. इसका तिलक आया था -
  2. द्वार पर बज रही थी -
  3. बड़े हंडे में पक रही थी -
  4. चारपाइयों पर विश्राम कर रहे थे -

(2) ‘सांस्कृतिक परंपरा के संवर्धन में हमारा योगदान’ इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रात का समय था। बुद्‌धिराम के द्‌वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्‍मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्‍वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्‍मिलित होना अपनी प्रतिष्‍ठा के प्रतिकूल समझते थे।

आज बुद्‌धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्‍सव था। घर के भीतर स्‍त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्‍त थी। भट्‌ठियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थी। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

मुखराम के तिलक उत्सव की तैयारियाँ:

  1. ______
  2. ______

(2) ‘उत्सवों का बदलता स्वरूप’ अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दीख पड़े थे। वह सोचने लगी-हाय! कितनी निर्दयी हूँ। जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान ! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो ! आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इंशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए, परन्तु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाए, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी । केवल इसी कारण कि, वह वृद्धा असहाय है।

(1) लिखिए -  (2)

गद्यांश में उल्लेखित रूप की मानसिकताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) रूपा की चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर 25 - 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

रूपा उस समय कार्य भार से उद्‌विग्‍न हो रही थी। कभी इस कोठे में जाती, कभी उस कोठे में, कभी कड़ाह के पास आती, कभी भंडार में जाती। किसी ने बाहर से आकर कहा- ‘महाराज ठंडाई माँग रहे हैं।’ ठंडाई देने लगी। आदमी ने आकर पूछा- ‘अभी भोजन तैयार होने में कितना विलंब है? जरा ढोल-मंजीरा उतार दो।’ बेचारी अकेली स्‍त्री दौड़ते-दौड़ते व्याकुल हो रही थी, झुँझलाती थी, कुढ़ती थी, परंतु क्रोध प्रकट करने का अवसर न पाती थी। भय होता, कहीं पड़ोसिनें यह न कहने लगें कि इतने में उबल पड़ीं। प्यास से स्‍वयं कंठ सूख रहा था। गरमी के मारे फुँकी जाती थी परंतु इतना अवकाश भी नहीं था कि जरा पानी पी ले अथवा पंखा लेकर झले। यह भी खटका था कि जरा आँख हटी और चीजों की लूट मची।
  1. संजाल पूर्ण कीजिए:      [2]

  2. ‘कर्तव्यनिष्ठा और कार्यपूर्ति’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]

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