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भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।

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प्रश्न

भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन को संतुलित रूप से जीने पर बल दिया गया है। नैतिकता से हमें सही और गलत का भेद समझ आता है। अध्यात्म से मन को शांति और जीवन का अर्थ मिलता है। व्यावहारिक जीवन से हम परिवार, काम और समाज की ज़िम्मेदारियाँ निभाते हैं।

इन तीनों में संतुलन हो तो जीवन सुखी और सार्थक बनता है। केवल धन या केवल पूजा-पाठ पर्याप्त नहीं है। हमें ईमानदारी से काम करना चाहिए, दूसरों की सहायता करनी चाहिए और मन की शांति के लिए समय निकालना चाहिए।

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अध्याय 2: क्या लिखूँ? - अभ्यास [पृष्ठ ३८]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga Class 9
अध्याय 2 क्या लिखूँ?
अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ३८
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