Advertisements
Advertisements
प्रश्न
भारतीय बैंकिंग प्रणाली, सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) वाणिज्यिक बैंकों की साख निर्माण क्षमता को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि ______।
विकल्प
यह सुनिश्चित करता है कि, सभी जमाओं को तरल परिसंपत्तियों में परिवर्तित कर दिया गया है।
इसमें बैंकों को जमाओं का एक निश्चित प्रतिशत तरल सम्पत्तियों के रूप में बनाए रखने की अनिवार्यता होती है।
यह ब्याज की वह अधिकतम सीमा निर्धारित करता है, जो बैंक ऋणों पर आरोपित कर सकते हैं।
बैंकों को उनकी कुल जमा राशि के एक विशिष्ट अनुपात से अधिक ऋण देने पर प्रतिबंध लगाता है।
Advertisements
उत्तर
भारतीय बैंकिंग प्रणाली, सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) वाणिज्यिक बैंकों की साख निर्माण क्षमता को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि इसमें बैंकों को जमाओं का एक निश्चित प्रतिशत तरल सम्पत्तियों के रूप में बनाए रखने की अनिवार्यता होती है।
स्पष्टीकरण:
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) इस बात को अनिवार्य करता है कि वाणिज्यिक बैंकों को अपनी जमा राशियों का एक निश्चित अनुपात तरल रूपों जैसे नकद, सोना तथा सरकारी प्रतिभूतियाँ के रूप में रखना चाहिए; इससे उधार देने के लिए उपलब्ध जमा का भाग घट जाता है। बैंकों को अपनी जमा का यह हिस्सा तरल संपत्तियों में रखने की आवश्यकता SLR के माध्यम से सीधे तौर पर उनके क्रेडिट‑सृजन (ऋण देने) की क्षमता को सीमित कर देती है।
