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भारत के पेट्रोलियम संसाधनों पर विस्तृत टिप्पणी लिखें।

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प्रश्न

भारत के पेट्रोलियम संसाधनों पर विस्तृत टिप्पणी लिखें।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

भातर में व्यवस्थित ढंग से खनिज तेल का अन्वेषण तथा उत्पादन 1956 ई० में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना के बाद प्रारंभ हुआ। उससे पहले असम में डिगबोई एकमात्र तेल उत्पादक केंद्र था जहाँ नहोर पोंग नामक स्थान पर 1857 ई० में भारत में पहला कुआँ खोदा गया था। हाल ही के वर्षों में देश के दूरतम पश्चिमी एवं पूर्वी तटों पर तेल के नए निक्षेप मिले हैं। इनमें डिगबोई, नहार कटिया तथा मोरान प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र हैं। गुजरात में अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा तथा लुनेज प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र हैं। मुंबई हाई, अरब सागर के अपतटीय क्षेत्र मुंबई से 160 कि०मी० दूर हैं, जिनमें 1976 ई० से उत्पादन प्रारंभ हुआ था। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग को पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी के बेसिनों में यह अन्वेषणात्मक कूपों में पाया गया है। कूपों से निकाला गया तेल अपरिष्कृत तथा अनेक अशुद्धिओं से परिपूर्ण होता है। प्रयोग से पहले इसे शोधित करना पड़ता है। भारत में दो प्रकार के तेलशोधक कारखाने/रिफाइनरीज हैं – (क) क्षेत्र आधारित, (ख) बाजार आधारित। भारत में कुल 18 परिष्करण शालाएँ हैं-डिगबोई (क्षेत्र आधारित) तथा बरौनी (बाज़ार आधारित) तेलशोधक कारखाने हैं। खनिज तेल के शोधन के बाद इससे प्राप्त प्रमुख उत्पाद-पेट्रोलियम पदार्थ हैं जिनका उपयोग, मोटर-वाहनों, रेलवे तथा वायुयानों के अंतर-दहन ईंधन के रूप में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए होता है। इसके अनेक सह-उत्पाद पेट्रो-रसायन उद्योगों जैसे-उर्वरक, कृत्रिम रबर, कृत्रिम रेशे, दवाइयाँ, वैसलीन, स्नेहकों, मोम, साबुन तथा अन्य सौंदर्य
प्रसाधनों, में प्रक्रमित किए जाते हैं।

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भारत में खनिजों का वितरण
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अध्याय 5: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन - अभ्यास [पृष्ठ ८४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Bhugol Bharat Log aur Arthvyavastha [Hindi] Class 12
अध्याय 5 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन
अभ्यास | Q 3. (i) | पृष्ठ ८४
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