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भारत के ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार’ में वायु परिवहन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

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प्रश्न

भारत के ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार’ में वायु परिवहन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वायु परिवहन एक महत्वपूर्ण और उभरता हुआ पहलू है, विशेष रूप से उच्च मूल्य वाली और समय के प्रति संवेदनशील वस्तुओं के लिए। इसके महत्त्व का विश्लेषण निम्नलिखित माध्यम से किया जा सकता है:

  1. तीव्रता और दक्षता: वायु परिवहन का सबसे तीव्र साधन है। यह उन अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक वस्तुओं के लिए अनिवार्य है जो शीघ्र खराब होने वाली हैं (जैसे फूल, फल और सब्जियाँ) और जीवन रक्षक दवाओं के लिए जिन्हें सीमाओं के पार तुरंत पहुँचाने की आवश्यकता होती है।
  2. उच्च-मूल्य वाली वस्तुओं का परिवहन: यह हीरे, सोना, आभूषण और सटीक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी उच्च मूल्य वाली और कम वजन वाली वस्तुओं को भेजने का पसंदीदा तरीका है।
  3. वैश्विक जुड़ाव: भारत के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु) देश को दुनिया के सभी प्रमुख बाजारों से जोड़ते हैं। यह कनेक्टिविटी आईटी (IT) और सेवा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पेशेवरों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवाजाही आसान हो जाती है।
  4. आपातकाल और राहत: वैश्विक संकटों या आपूर्ति श्रृंखला के टूटने के दौरान, वायु परिवहन आवश्यक वस्तुओं के निरंतर प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे भारत के व्यापार की विश्वसनीयता बनी रहती है।
  5. तटीय व्यापार के लिए पूरक: जहाँ जल परिवहन भारी सामानों का परिवहन करता है, वहीं वायु परिवहन आधुनिक वैश्विक विनिर्माण की ‘जस्ट-इन-टाइम’ (समय पर पहुँचने वाली) डिलीवरी की आवश्यकताओं को पूरा करके इसकी कमी को पूरा करता है।
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2025-2026 (March) 64/1/3

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