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ऑर्थो तथा पैरा-नाइट्रोफ़ीनॉल, फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय होती हैं। उनके संगत फ़ीनॉक्साइड आयनों की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए। - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

ऑर्थो तथा पैरा-नाइट्रोफ़ीनॉल, फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय होती हैं। उनके संगत फ़ीनॉक्साइड आयनों की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।

रासायनिक समीकरण/संरचनाएँ
लघु उत्तरीय
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उत्तर


           o-नाइट्रोफ़ीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ


           p-नाइट्रोफ़ीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ


                फ़ीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ

प्रतिस्थापित फ़ीनॉलों में इलेक्ट्रॉन निष्कासक समूह (electron withdrawing group) जैसे नाइट्रो समूह; फ़ीनॉल की अम्लीय सामर्थ्य को बढ़ा देते हैं। जब ऐसे समूह ऑर्थो एवं पैरा स्थितियों पर उपस्थित होते हैं तो यह प्रभाव अधिक प्रबल हो जाता है। इसका कारण फोनॉक्साइड आयन के ऋणायन का प्रभावी विस्थानने (delocalisation) है। अत: फ़ीनॉल की तुलना में o- तथा p-नाइट्रोफ़ीनॉल अधिक अम्लीय होते हैं।

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ऐल्कोहॉली और फ़िनॉलो का रासायनिक अभिक्रियाएँ - अभिक्रियाएँ जिनमें कार्बन-ऑक्सीजन (C-O) आबंध का विदलन (Cleavage) होता है
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अध्याय 7: ऐल्कोहॉल, फ़िनॉल एवं ईथर - पाठ्यनिहित प्रश्न [पृष्ठ २१९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12
अध्याय 7 ऐल्कोहॉल, फ़िनॉल एवं ईथर
पाठ्यनिहित प्रश्न | Q 7.8 | पृष्ठ २१९

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\[\begin{array}{cc}
\phantom{.......................}\ce{Br}\\
\phantom{......................}|\\
\ce{CH3 - CH - CH - CH3 ->[HBr] CH3 - C - CH2 - CH3}\\
\phantom{.}|\phantom{......}|\phantom{......................}|\phantom{........}\\
\phantom{}\ce{CH3}\phantom{...}\ce{OH}\phantom{...................}\ce{CH3}\phantom{.....}
\end{array}\]

इस अभिक्रिया की क्रियाविधि दीजिए।

(संकेत: चरण II में प्राप्त द्वितीयक कार्बोकैटायन हाइड्राईड आयन विचलन के कारण पुनर्विन्यासित होकर स्थायी तृतीयक कार्बोकैटायन बनाते हैं।)


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