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प्रश्न
अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-
तुमने मेरी पुस्तक क्यों नहीं लौटा दी है?
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उत्तर
अशुद्ध वाक्य - तुमने मेरी पुस्तक क्यों नहीं लौटा दी है?
शुद्ध वाक्य - तुमने मेरी पुस्तक क्यों नहीं लौटाई।
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क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है तो उसे अन्विति कहते हैं।
क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे- सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया, कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)
अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-
- घोड़ा पानी पी रहा था।
- बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
- रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
- देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।
इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए-
(क) ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी।
(ख) उन्होंने ऐसी फ़िल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था।
(ग) फ़िल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा।
(घ) खालिस देहाती भुच्चे गाड़ीवान जो सिर्फ दिल की जुबान समझता है, दिमाग की नहीं।
निम्नलिखित शब्द का समानार्थी शब्द लिखो तथा उनका वाक्य में प्रयोग करो :
मनुष्य
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
राजेश अभिमानी लड़का है।
दिए गए अनुसार रचना की दृष्टि से सरल, संयुक्त, मिश्र अन्य वाक्य पाठ से खोजकर तालिका पूर्ण कीजिए:

निम्नलिखित शब्द के युग्म शब्द बताओ और वाक्य में उचित शब्दयुग्म लिखो:
घर - ______
दीपावली में ______ मिठाइयॉं बनती हैं।
निम्नलिखित शब्द को लेकर चार मुहावरे लिखो।
हाथ
१. ______
२. ______
३. ______
४. ______
शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए:-
दुकान
वचन बदलिए।
एक = ______
परिच्छेद में आए सर्वनामों की सूची तैयार कीजिए।
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भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
