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ऐसे जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सामान ढोने के काम में लाते हैं।

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प्रश्न

ऐसे जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सामान ढोने के काम में लाते हैं।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

गधा, भैंस, बैल, हाथी, घोड़ा, ऊँट और याक का उपयोग सामान ढोने के लिए किया जाता है।

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नन्दू हाथी
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अध्याय 3: नन्दू हाथी - सोचो और लिखो [पृष्ठ २७]

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एनसीईआरटी Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 4
अध्याय 3 नन्दू हाथी
सोचो और लिखो | Q 4 | पृष्ठ २७

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तुम्हारी उम्र के कितने बच्चों का वज़न मिलाकर नन्दू के वज़न के बराबर होगा?


हाथियों के झुंड का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए तुम हाथियों के जितने चित्र इकट्ठा कर सकते हो, करो। अब उन्हें काटकर अपनी कॉपी में चिपकाओ।


नन्दू वह सब करता था, जो उसे पसंद था। यदि तुम्हें अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक पूरा दिन मिले, तो तुम उस दिन क्या-क्या करोगे?


क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना कैसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के फ़ायदे और नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं?

फ़ायदे नुकसान
   

हाथी को चैन से बंधे होने पर कैसा महसूस होता होगा? अपनी भावना बताएँ तथा चर्चा करें। 


क्या तुमने कभी हाथी पर सवारी की है? कैसा लगा?


बगुला भैंस पर क्यों बैठा होगा?


ऐसे और जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सवारी के काम में लाते हैं।


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  • अब चित्र में जहाँ ‘काटो’ (✄) लिखा है, वहाँ थोड़ा-सा काटो। ध्यान रहे काट कर अलग मत करना।
  • जहाँ ‘मोड़ो’ लिखा है, वहाँ से बिंदु वाली रेखा (.....) पर से मोड़ लो।
  • धारी वाले हिस्से को (/////////) अंदर की ओर मोड़ दो।
  • अब पूँछ बनाकर चिपका दो।

बन गया न हाथी!

  • इसे अपनी पसंद के रंगों से और अलग-अलग तरह से सजाओ।
  • इस हाथी को अपनी कक्षा में लटकाओ। अपने साथियों के बनाए हुए हाथी भी देखो।


इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।

यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा!
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से!
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है।
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म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ।
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं।

तुमने इन जानवरों की बातें पढ़ीं। तुम्हें क्या लगता है, इनमें से कुछ उदास क्यों हैं?


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