Advertisements
Advertisements
प्रश्न
अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा।
- अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा। ऊपर रेखांकित संज्ञाएँ क्रमशः किसी भाव और किसी की विशेषता के बारे में बता रही हैं। ऐसी संज्ञाएँ भाववाचक कहलाती हैं। गुण और भाव के अलावा भाववाचक संज्ञाओं का संबंध किसी की दशा और किसी कार्य से भी होता है। भाववाचक संज्ञा की पहचान यह है कि इससे जुड़े शब्दों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। आगे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़ो और समझो। इनमें से कुछ शब्द संज्ञा और क्रिया से बने हैं। उन्हें भी पहचानकर लिखो-
|
मिठास |
भूख |
शांति |
भोलापन |
|
बुढ़ापा |
घबराहट |
बहाव |
फुर्ती |
|
ताज़गी |
क्रोध |
मज़दूरी |
अहसास |
Advertisements
उत्तर
मिठास – विशेषण शब्द ‘मीठा’ से बना है।
बुढ़ापा – विशेषण शब्द “बूढ़ा’ से बना है।
ताज़गी – विशेषण शब्द ‘ताजा’ से बना है।
भूख – विशेषण शब्द ‘भूखा’ से बना है।
घबराहट – क्रिया शब्द ‘घबराना’ से बना है।
क्रोध – यह एक भाव वाचक संज्ञा शब्द है।
शांति – यह विशेषण शब्द ‘शांत’ से बना है।
बहना – यह क्रिया शब्द ‘बहाव’ से बना है।
मजदूरी – यह जातिवाचक संज्ञा शब्द ‘मजदूर’ से बना है।
भोलापन – यह विशेषण शब्द “भोला’ से बना है।
फुर्ती – यह एक भाववाचक संज्ञा शब्द है जो
‘फुर्त’ – या ‘फुर्तीला’ विशेषण शब्द से बनी
अहसास – यह भी एक भाववाचक संज्ञा शब्द है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
राम कथा का कौन-सा प्रसंग तुम्हें सबसे रोचक लगा? उसे अपने शब्दों में लिखिए।
क्रियाओं से भी भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं। जैसे मारना से मार, काटना से काट, हारना से हार, सीखना से सीख, पलटना से पलट और हड़पना से हड़प आदि भाववाचक संज्ञाएँ बनी हैं। तुम भी इस संस्मरण से कुछ क्रियाओं को छाँटकर लिखो और उनके भाववाचक संज्ञा बनाओ।
अनादि काल में रेखांकित शब्द का अर्थ है जिसकी कोई शुरुआत या आदि न हो। | यह शब्द मूल शब्द के शुरू में कुछ जोड़ने से बना है। इसे उपसर्ग कहते हैं। इन उपसर्गों को अलग करके मूल शब्दों को लिखकर उनका अर्थ समझो
असफल ______ अदृश्य ______
अनुचित ______ अनावश्यक ______
अपरिचित ______ अनिच्छा ______
बहुविकल्पीय प्रश्न
अक्षरों की खोज का सिलसिला लगभग कब शुरू हुआ?
आदमी ने गाँवों में रहना कब से शुरू किया?
‘सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया’-साहिर ने ऐसा क्यों कहा है? लिखो।
इस कहानी के अनुसार मंगल ग्रह पर कभी आम जन-जीवन था। वह सब नष्ट कैसे हो गया? इसे लिखो।
कहानी में अंतरिक्ष यान को किसने भेजा था और क्यों?
यदि तुमने ‘नया दौर’ फ़िल्म देखी है तो बताओ कि यह गीत फ़िल्म में कहानी के किस मोड़ पर आता है? यदि तुमने फ़िल्म नहीं देखी है तो फ़िल्म देखो और बताओ।
कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना”-
इस वाक्य को गीतकार इस प्रकार कहना चाहता है
(तुमने) कल गैरों की खातिर (मेहनत) की, आज (तुम) अपनी खातिर करना।
इस वाक्य में ‘तुम’ कर्ता है जो गीत की पंक्ति में छंद बनाए रखने के लिए हटा दिया गया है। उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘अपनी’ का प्रयोग कर्ता ‘तुम’ के लिए हो रहा है, इसलिए यह सर्वनाम है। ऐसे सर्वनाम जो अपने आप के बारे में बताएँ निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। (निज का अर्थ ‘अपना’ होता है।)
निजवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार होते हैं जो नीचे दिए वाक्यों में रेखांकित हैं-
मैं अपने आप (या आप) घर चली जाऊँगी।
बब्बन अपना काम खुद करता है।
सुधा ने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा।
अब तुम भी निजवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो।
- अपने को
- अपने से
- अपना
- अपने पर
- अपने लिए
- आपस में
इस गीत से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
‘सड़क के किनारे एक सुंदर फ्लैट में बैठक का दृश्य। उसका एक दरवाज़ा सड़क वाले बरामदे में खुलता है… उस पर एक फ़ोन रखा है। इस बैठक की पूरी तसवीर बनाओ।
बहुविकल्पीय प्रश्न
इस पाठ के लेखक कौन हैं?
कान से न सुन पाने पर आस-पास की दुनिया कैसी लगती होगी? इस पर टिप्पणी लिखो और कक्षा में पढ़कर सुनाओ।
बहुविकल्पी प्रश्न
गांधी जी सवेरे की प्रार्थना के बाद कौन-सा कार्य करते थे?
खपच्चियों को तैयार करने में किस बात का ध्यान रखा जाता है?
बाँस के कई उपयोग इस पाठ में बताए गए हैं लेकिन बाँस के उपयोग का दायरा बहुत बड़ा है। नीचे दिए गए शब्दों की मदद से तुम इस दायरे को पहचान सकते हो-
- संगीत
- मच्छर
- फर्नीचर
- प्रकाशन
- एक नया संदर्भ
| प्राकृतिक संसाधन | दैनिक उपयोग की वस्तुएँ |
| चमड़ा | ________________ |
| घास के तिनके | ________________ |
| पेड़ की छाल | ________________ |
| गोबर | ________________ |
| मिट्टी | ________________ |
