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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

आकृति पहचानकर उसके उपयोग स्पष्ट कीजिए। - Science and Technology 1 [विज्ञान और प्रौद्योगिकी १]

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प्रश्न

आकृति पहचानकर उसके उपयोग स्पष्ट कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

दिष्ट जनित्र

  • धूरी को बाहर से किसी यंत्र द्वारा घूमाया जाता है। दिष्ट विद्युतधारा जनित्र की कुंडली जब चुंबकीय क्षेत्र में अपने ही चारों ओर घूमती है, तब विद्युत चुंबकीय प्रवर्तन के कारण कुंडली में विद्युत विभवांतर उत्पन्न होता है। फलतः कुंडली में प्रेरित विद्युतधारा उत्पन्न होती है। प्रकाशमान बल्ब अथवा गैल्वनोमीटर (galvanometer) यह विद्युतधारा दर्शाता है। विद्युतधारा की दिशा कुंडली के परिवलन की दिशा पर निर्भर होती है।
  • इस प्रकार के जनित्र में कार्बन का एक ब्रश निरंतर आर्मेचर की ऊर्ध्व दिशा में कार्यरत भुजा के संपर्क में होता है, जबकि दूसरा ब्रश, निरंतर आर्मेचर की अधोदिशा में कार्यरत भुजा के संपर्क में होता है। परिणामस्वरूप जब तक कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती रहती है, तब तक विद्युत परिपथ में एक ही दिशा में विद्युतधारा प्रवाहित होती रहती है। कुंडली जब तक चुंबकीय क्षेत्र में घूमती रहती है, तब तक विद्युतधारा का निर्माण होता रहता है।
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प्रत्यावर्ती धारा और दिष्ट धारा (Alternating Current (AC) and Direct Current (DC)
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अध्याय 4: विद्‌युत धारा का परिणाम - स्वाध्याय [पृष्ठ ६१]

APPEARS IN

बालभारती Vigyaan aur Prodyogiki 1 [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 4 विद्‌युत धारा का परिणाम
स्वाध्याय | Q 11. इ. | पृष्ठ ६१
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