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आकाश से सीधे आती हूँ, झटपट चूहा ले जाती हूँ। पूँछ है मेरी खाँचे वाली ______ हूँ मैं बड़ी निराली।

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प्रश्न

आकाश से सीधे आती हूँ, झटपट चूहा ले जाती हूँ। पूँछ है मेरी खाँचे वाली ______ हूँ मैं बड़ी निराली।

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उत्तर

आकाश से सीधे आती हूँ, झटपट चूहा ले जाती हूँ। पूँछ है मेरी खाँचे वाली चील हूँ मैं बड़ी निराली।

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पंख फैलाएँ, उड़ते जाएँ
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अध्याय 8: पंख फैलाएँ, उड़ते जाएँ - पंख फैलाएँ, उड़ते जाएँ [पृष्ठ ५२]

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एनसीईआरटी Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 3
अध्याय 8 पंख फैलाएँ, उड़ते जाएँ
पंख फैलाएँ, उड़ते जाएँ | Q 2. | पृष्ठ ५२

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सिर पर मेरे ______ है, सुंदर पंखों पर नाज़ है। सुंदर नाच दिखाता हूँ, राष्ट्रीय पक्षी कहलाता हूँ।


हरे-हरे हैं मेरे पंख लाल है मेरी ______ का रंग। हरी मिर्च मैं खाता हूँ ______ मैं कहलाता हूँ।


कुहू-कुहू आवाज़ लगाती, मधुर-मधुर मैं गीत सुनती। सबके मन को हूँ मैं भाती, देखो ______ मैं कहलाती।


पेड़ के ______ में छेद बनाऊँ, उसमें छिपे कीड़े मैं खाऊँ। टुकटुक करता जाता हूँ, कठफोड़वा कहलाता हूँ।


पाठ में आए पक्षियों जैसे की तोता, कौवा, कोयल, गिद्ध, कबूतर, चिड़िया, गौरेया, मोर, चील में से तुमने किन-किन को देखा है? उनके नाम लिखो।


अब बाहर जाकर देखो तुम्हें कितने पक्षी दीखते हैं। पेड़ पर ही नहीं, मैदान में, पानी में, पानी के आस-पास तथा झाड़ियों में भी देखना।


पक्षियों के नाम भरो तथा सही जगह पर '✓' का निशान लगाओ। यदि नाम नहीं पजंते तो उनकी कोई पहचान लिखो।

पक्षियों के नाम जहाँ देखा है
पानी में पेड़ पर जमीन पर घर में उड़ते हुए
           
           
           
           
           
           
           

चित्र में दिए गए पक्षियों को उनके भोजन के साथ जोड़ो।


अगर तुम भी पक्षियों की तरह उड़ सकते, तो तुम कहाँ-कहाँ जाते? क्या-क्या करते?


यदि पक्षी उड़ न सकें, बस अपने पैरों पर ही चलें तो क्या होगा?


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