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Solutions for Chapter 9: संविधान - एक जिवंत दस्तावेज़
Below listed, you can find solutions for Chapter 9 of CBSE NCERT for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११.
NCERT solutions for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११ 9 संविधान - एक जिवंत दस्तावेज़ प्रश्नावली [Pages 217 - 219]
निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य सही है?
संविधान में समय-समय पर संशोधन करना आवश्यक होता है; क्योंकि
परिस्थितियाँ बदलने पर संविधान में उचित संशोधन करना आवश्यक हो जाता है।
किसी समय विशेष में लिखा गया दस्तावेज कुछ समय पश्चात् अप्रासंगिक हो जाता
हर पीढ़ी के पास अपनी पसन्द का संविधान चुनने का विकल्प होना चाहिए।
संविधान में मौजूदा सरकार का राजनीतिक दर्शन प्रतिबिम्बित होना चाहिए।
निम्नलिखित वाक्यों के सामने सही/गलत का निशान लगाएँ
राष्ट्रपति किसी संशोधन विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए नहीं भेज सकता।
सही
गलत
संविधान में संशोधन करने का अधिकार केवल जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के पास ही होता है।
सही
गलत
न्यायपालिका संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव नहीं ला सकती परन्तु उसे संविधान की व्याख्या करने का अधिकार है। व्याख्या द्वारा वह संविधान को काफी हद तक बदल सकती है।
सही
गलत
संसद संविधान के किसी भी खंड में संशोधन कर सकती है।
सही
गलत
निम्नलिखित में से कौन भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं?
इस प्रक्रिया में ये कैसे शामिल होते हैं?
- मतदाता
- भारत का राष्ट्रपति
- राज्य की विधानसभाएँ
- संसद
- राज्यपाल
- न्यायपालिका।
इस अध्याय में आपने पढ़ा कि संविधान का 42वाँ संशोधन अब तक का सबसे विवादास्पद संशोधन रहा है। इस विवाद के क्या कारण थे?
- यह संशोधन राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान किया गया था। आपातकाल की घोषणा अपने आप में ही एक विवाद का मुद्दा था।
- यह संशोधन विशेष बहुमत पर आधारित नहीं था।
- इसे राज्य विधानपालिकाओं का समर्थन प्राप्त नहीं था।
- संशोध्न के कुछ उपबन्ध विवादास्पद थे।
निम्नलिखित वाक्यों में कौन-सा वाक्य विभिन्न संशोधनों के सम्बन्ध में विधायिका और न्यायपालिका के टकराव की सही व्याख्या नहीं करता?
संविधान की कई तरह से व्याख्या की जा सकती है।
खंडन-मंडन/बहस और मदभेद लोकतंत्र के अनिवार्य अंग होते हैं।
कुछ नियमों और सिद्धांतों को संविधान में अपेक्षाकृत ज्यादा महत्त्व दिया गया है। कतिपय संशोधनों के लिए संविधान में विशेष बहुमत की व्याख्या की गई है।
नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी विधायिका को नहीं सौंपी जा सकती।
न्यायपालिका केवल किसी कानून की संवैधानिकता के बारे में फैसला दे सकती है। वह ऐसे कानूनों की वांछनीयता से जुड़ी राजनीतिक बहसों का निपटारा नहीं कर सकती।
बुनियादी ढाँचे के सिद्धांत के बारे में सही वाक्य को चिह्नित करें। गलत वाक्य को सही करें।
- संविधान में बुनियादी मान्यताओं का खुलासा किया गया है।
- बुनियादी ढाँचे को छोड़कर विधायिका संविधान के सभी हिस्सों में संशोधन कर, सकती है।
- न्यायपालिका ने संविधान के उन पहलुओं को स्पष्ट कर दिया है जिन्हें बुनियादी ढाँचे के अन्तर्गत या उसके बाहर रखा जा सकता है।
- यह सिद्धांत सबसे पहले केशवानंद भारती मामले में प्रतिपादित किया गया है।
- इस सिद्धांत से न्यापालिका की शक्तियाँ बढ़ी हैं। सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी बुनियादी ढाँचे के सिद्धांत को स्वीकार कर लिया है।
सन् 2000-2003 के बीच संविधान में अनेक संशोधन किए गए। इस जानकारी के आधार पर आप निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष निकालेंगे-
इस काल के दौरान किए गए संशोधन में न्यायपालिका ने कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं किया।
इस काल के दौरान एक राजनीतिक दल के पास विशेष बहुमत था।
कतिपय संशोधनों के पीछे जनता का दबाव काम कर रहा था।
इस काल में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कोई वास्तविक अन्तर नहीं रह गया था।
ये संशोधन विवादास्पद नहीं थे तथा संशोधनों के विषय को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति पैदा हो चुकी थी।
संविधान में संशोधन करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता क्यों पड़ती है? व्याख्या करें।
भारतीय संविधान में अनेक संशोधन न्यायपालिका और संसद की अलग-अलग व्याख्याओं का परिणाम रहे हैं। उदाहरण सहित व्याख्या करें।
अगर संशोधन की शक्ति जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होती है तो न्यायपालिका को संशोधन की वैधता पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। क्या आप इस बात से सहमत हैं? 100 शब्दों में व्याख्या करें।
Solutions for 9: संविधान - एक जिवंत दस्तावेज़
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NCERT solutions for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११ chapter 9 - संविधान - एक जिवंत दस्तावेज़
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