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NCERT solutions for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११ chapter 5 - विधायिका [Latest edition]

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NCERT solutions for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११ chapter 5 - विधायिका - Shaalaa.com
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Solutions for Chapter 5: विधायिका

Below listed, you can find solutions for Chapter 5 of CBSE NCERT for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११.


प्रश्नावली
प्रश्नावली [Pages 122 - 123]

NCERT solutions for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११ 5 विधायिका प्रश्नावली [Pages 122 - 123]

1.Page 122

आलोक मानता है कि किसी देश को कारगर सरकार की जरूरत होती है जो जनता की भलाई करे। अतः यदि हम सीधे-सीधे अपना प्रधानमंत्री और मंत्रिगण चुन लें और शासन का काम उन पर छोड़ दें, तो हमें विधायिका की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण बताएँ।

2.Page 122

किसी कक्षा में द्वि-सदनीय प्रणाली के गुणों पर बहस चल रही थी। चर्चा में निम्नलिखित बातें उभरकर सामने आईं। इन तर्को को पढ़िए और इनसे अपनी सहमति-असहमति के कारण बताइए-

  1. नेहा ने कहा कि द्वि-सदनीय प्रणाली से कोई उद्देश्य नहीं सधता।
  2. शमा का तर्क था कि राज्यसभा में विशेषज्ञों का मनोनयन होना चाहिए।
  3. त्रिदेव ने कहा कि यदि कोई देश संघीय नहीं है, तो फिर दूसरे सदन की जरूरत नहीं रह जाती।
3.Page 122

लोकसभा कार्यपालिका को राज्यसभा की तुलना में क्यों कारगर ढंग से नियन्त्रण में रख सकती है?

4.Page 122

लोकसभा कार्यपालिका पर कारगर ढंग से नियन्त्रण रखने की नहीं बल्कि जनभावनाओं और जनता की अपेक्षाओं की अभिव्यक्ति का मंच है। क्या आप इससे सहमत हैं? कारण बताएँ।

5.Page 122

नीचे संसद को ज्यादा कारगर बनाने के कुछ प्रस्ताव लिखे जा रहे हैं। इनमें से प्रत्येक के साथ अपनी सहमति या असहमति का उल्लेख करें। यह भी बताएँ कि इन सुझावों को मानने के क्या प्रभाव होंगे?

  1. संसद को अपेक्षाकृत ज्यादा समय तक काम करना चाहिए।
  2. संसद के सदस्यों की सदन में मौजूदगी अनिवार्य कर दी जानी चाहिए।
  3. अध्यक्ष को यह अधिकार होना चाहिए कि सदन की कार्यवाही में बाधा पैदा करने पर सदस्य को दण्डित कर सकें।
6.Page 122

आरिफ यह जानना चाहता था कि अगर मंत्री ही अधिकांश महत्त्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत करते हैं और बहुसंख्यक दल अकसर सरकारी विधेयक को पारित कर देता है, तो फिर कानून बनाने की प्रक्रिया में संसद की भूमिका क्या है? आप आरिफ को क्या उत्तर देंगे?

7.Page 123

आप निम्नलिखित में से किस कथन से सबसे ज्यादा सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण दें।

  1. सांसद/विधायकों को अपनी पसन्द की पार्टी में शामिल होने की छुट होनी चाहिए।
  2. दल-बदल विरोधी कानून के कारण पार्टी के नेता का दबदबा पार्टी क सांसद/विधायकों पर बढ़ा है।
  3. दल-बदल हमेशा स्वार्थ के लिए होता है और इस कारण जो विधायक/सांसद दूसरे दल में शामिल होना चाहता है उसे आगामी दो वर्षों के लिए मंत्री-पद के अयोग्य करार कर दिया जाना चाहिए।
8.Page 123

डॉली और सुधा में इस बात पर चर्चा चल रही है कि मौजूदा वक्त में संसद कितनी कारगर और प्रभावकारी है। डॉली का मानना था कि भारतीय संसद के कामकाज में गिरावट आयी है। यह गिरावट एकदम साफ दिखती है क्योंकि अब बहस-मुबाहिसे पर समय कम खर्च होता है और सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने अथवा वॉकआउट (बहिर्गमन) करने में ज्यादा। सुधा का तर्क था कि लोकसभा में अलग-अलग सरकारों ने मुँह की खायी हैं, धराशायी हुई है। आप सुधा या डॉली के तर्क के पक्ष या विपक्ष में और कौन-सा तर्क देंगे?

9.Page 123

किसी विधेयक को कानून बनने के क्रम में जिन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है उन्हें क्रमवार सजाएँ।
(क) किसी विधेयक पर चर्चा के लिए प्रस्ताव पारित किया जाता है।
(ख) विधेयक भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है- बताएँ कि वह अगर इस पर हस्ताक्षर नहीं करता/करती है, तो क्या होता है?
(ग) विधेयक दूसरे सदन में भेजा जाता है और वहाँ इसे पारित कर दिया जाता है।
(घ) विधेयक का प्रस्ताव जिसे सदन में हुआ है उसमें यह विधेयक पारित होता है।
(ङ) विधेयक की हर धारा को पढ़ा जाता है और प्रत्येक धारा पर मतदान होता है।
(च) विधेयक उप-समिति के पास भेजा जाता है- समिति उसमें कुछ फेर-बदल करती है। और चर्चा के लिए सदन में भेज देती है।
(छ) सम्बद्ध मंत्री विधेयक की जरूरत के बारे में प्रस्ताव करता है।
(ज) विधि मन्त्रालय का कानून-विभाग विधेयक तैयार करता है।

10.Page 123

संसदीय समिति की व्यवस्था से संसद के विधायी कामों के मूल्यांकन और देखरेख पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Solutions for 5: विधायिका

प्रश्नावली
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NCERT solutions for राजनीति विज्ञान भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार [हिन्दी] इयत्ता ११ chapter 5 - विधायिका

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