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निम्न वाक्यों में से सर्वनाम एवं क्रियाएँ छॉंटकर भेदों सहित लिखिए तथा पाठ्यपुस्तक से खोजकर नए अन्य वाक्य बनाइए:

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निम्न में से संज्ञा तथा विशेषण पहचानकर भेदों सहित लिखिए तथा अन्य पाठ्यपुस्तक से खोजकर नए वाक्य बनाइए :
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आजादी की प्राप्ति में ‘स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान’ पर निबंध लिखिए।
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‘व्यक्तित्व विकास में समय का व्यवस्थापन’ विषय पर समाचारपत्र/लेख पढ़िए तथा उसपर टिप्पणी बनाइए।
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‘संचार माध्यम द्वारा समय का पालन अचूकता से किया जाता है’ इसपर चर्चा कीजिए।
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‘नयन-प्राण में रूप के स्वप्न कितने निशा ने जगाए, उषा ने सुलाए’ इन पंक्तियों से अभिप्रेत अर्थ लिखिए।
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संगीत, लय निर्माण करने वाली शब्द जोड़ियाँ लिखिए।
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‘नियमितता से सफलता की ओर’, इसपर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
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कविता (समय की शिला पर) से प्राप्त संदेश लिखिए।
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‘नदी और समुद्र’ के बीच होने वाला संवाद अपने शब्दों में लिखिए।
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‘अंगदान का महत्त्व’ इस विषय पर आयोजित चर्चा में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
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किसी दिव्यांग व्यक्ति का साक्षात्कार लेने हेतु प्रश्न निर्मिति कीजिए।
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| पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
संजाल पूर्ण कीजिएः

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| पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
उत्तर लिखिए:
‘बच्चे दूर से यह देख रहे थे।’ इस वाक्य से होने वाला बोध
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| पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
‘गुस्से पर काबू रखना’ इसपर अपने विचार लिखिए।
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'सींकवाली' कहानी में प्रयुक्त पात्रों के नामों की सूची बनाइए।
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ताई का वात्सल्य प्रकट करने वाले वाक्य ढॅूंढ़कर लिखिए।
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बच्चों से प्रेम करने वाले महापुरुषों के जीवन के कोई प्रसंग बताइए।
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