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SSC (English Medium) इयत्ता १० वी - Maharashtra State Board Question Bank Solutions

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विषय
मुख्य विषय
अध्याय

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निम्नलिखित वाक्य के अधोरेखांकित शब्द का शब्दभेद पहचानकर लिखिए:

आज फिर उसे साक्षात्कार के लिए जाना है।

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

गाड़ी ले हम चल पड़े। क्या शान की सवारी थी। याद कर बदन में झुरझुरी आने लगी है। जिसके यहाँ खाना था, वहाँ पहुँचा। बातचीत में समय का ध्यान नहीं रहा। देर हो गई।

याद आया बाबू जी आ गए होंगे।

वापस घर आ फाटक से पहले ही गाड़ी रोक दी। उतरकर गेट तक आया। संतरी को हिदायत दी। यह सैलूट-वैलूट नहीं, बस धीरे से गेट खोल दो। वह आवाज करे तो उसे बंद मत करो, खुला छोड़ दो।

बाबू जी का डर। वह खट-पट सैलूट मारेगा तो आवाज होगी और फिर गेट की आवाज से बाबू जी को हम लोगों के लौटने का अंदाजा हो जाएगा। वे बेकार में पूछताछ करेंगे। अभी बात ताजा है। सुबह तक बात में पानी पड़ चुका होगा। संतरी से जैसा कहा गया, उसने किया। दबे पैर पीछे किचन के दरवाजे से अंदर घुसा। जाते ही अम्मा मिलीं।

पूछा - ‘‘बाबू जी आ गए? कुछ पूछा तो नहीं ?’’

बोली - ‘‘हाँ, आ गए। पूछा था। मैंने बता दिया।’’

(1) उत्तर लिखिए: (2)

लेखक द्वारा संतरी को दी गई दो सूचनाएँ:

  1. ______
  2. ______

(2) लिखिए: (2)

  1. शान की सवारी याद आने का परिणाम ______
  2. बातचीत में समय बिताने का परिणाम ______

(3) 

(क) गद्यांश से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन से रूप नहीं बदलता: (1)

  1. ______

______

(ख) गदयांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

(4) ‘दादा-दादी के प्रति मेरा कर्तव्य’ विषय पर अपने विचार लिखिए। (2)

[2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
Chapter: [2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

संस्कृति ऐसी चीज नहीं है कि जिसकी रचना दस-बीस या सौ-पचास वर्षों में की जा सकती हो। अनेक शताब्दियों तक एक समाज के लोग जिस तरह खाते-पीते, रहते-सहते, पढ़ते-लिखते, सोचते-समझते और राज-काज चलाते अथवा धर्म-कर्म करते हैं, उन सभी कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन्न होती है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है। यहाँ तक कि हमारे उठने-बैठने, पहनने-ओढ़ने, घूमने-फिरने और रोने-हँसने में भी हमारी संस्कृति की पहचान होती है। हमारा कोई भी काम हमारी संस्कृति का पर्याय नहीं बन सकता।असल में संस्कृति जिंदगी का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है, जिसमें हम जन्म लेते हैं। इसलिए जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, अथवा जिस समाज से मिलकर हम जी रहे हैं, उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है।

(1) घटक लिखिए: (2)

(2) विधानों को पढ़कर केवल सही अथवा गलत लिखिए: (2)

  1. समाज के लोगों के कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन होती है ______
  2. हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं होती ______
  3. जिस संस्कृति में हम पैदा हुए हैं उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है ______
  4. संस्कृति जिंदगी का तरीका नहीं है ______

(3) दी गई सूचना के अनुसार लिखिए: (2)

(4) ‘पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव’ अपने विचार लिखिए। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:

मुद्दे समता की ओर
(1) रचनाकार का नाम  
(2) रचना की विधा  
(3) पसंद की पंक्तियाँ  
(4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण  
(5) रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा  
[2.11] समता की ओर
Chapter: [2.11] समता की ओर
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रात का समय था। बुद्‌धिराम के द्‌वार पर शहनाई बज रही थी और गाँव के बच्चों का झुंड विस्‍मयपूर्ण नेत्रों से गाने का रसास्‍वादन कर रहा था। चारपाइयों पर मेहमान विश्राम कर रहे थे। दो-एक अंग्रेजी पढ़े हुए नवयुवक इन व्यवहारों से उदासीन थे। वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्‍मिलित होना अपनी प्रतिष्‍ठा के प्रतिकूल समझते थे।

आज बुद्‌धिराम के बड़े लड़के मुखराम का तिलक आया था। यह उसी का उत्‍सव था। घर के भीतर स्‍त्रियाँ गा रही थीं और रूपा मेहमानों के लिए भोजन के प्रबंध में व्यस्‍त थी। भट्‌ठियों पर कड़ाह चढ़ रहे थे। एक में पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं, दूसरे में अन्य पकवान बन रहे थे। एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थी। घी और मसाले की क्षुधावर्धक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

मुखराम के तिलक उत्सव की तैयारियाँ:

  1. ______
  2. ______

(2) ‘उत्सवों का बदलता स्वरूप’ अपने विचार लिखिए। (2)

[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सितारे छिपे
बादलों की ओट में
सूना आकाश।

तुमने दिए
जिन गीतों को स्‍वर
हुए अमर।

सागर में भी
रहकर मछली
प्यासी ही रही।

(1) तालिका पूर्ण कीजिए: (2)

  स्थिति निवास स्थान
मछली ______ ______
सितारे ______ ______

(2) ‘रात में सितारे आकाश की शोभा बढ़ाते हैं’ अपने विचार लिखिए। (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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अधोरेखांकित शब्द का भेद पहचानकर लिखिए:

उस आश्रम का विज्ञापन अखबार में नहीं दिया जाए।

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित शब्द का प्रयोग अपने वाक्य में कीजिए:

‘आलीशान’

[3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषा अध्ययन)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

तिवारी जी: नागर जी, मैं आपको आपके लेखन के आरंभ काल की ओर ले चलना चाहता हूँ। जिस समय आपने लिखना शुरू किया, उस समय का साहित्यिक माहौल कया था? किन लोगों से प्रेरित होकर आपने लिखना शुरू किया और क्या आदर्श थे आपके सामने?
नागर जी: लिखने से पहले तो मैंने पढ़ना शुरू किया था। आरंभ में कवियों को ही अधिक पढ़ता था। सनेहीं जी, अयोध्यासिंह उपाध्याय की कविताएँ ज्यादा पढ़ीं। छापे का अक्षर मेरा पहला मित्र था। घर में दो पत्रिकाएँ मँगातें थे मेरे पितामह। 'एक “सरस्वती ' और दूसरी 'गृहलक्ष्मी'। उस समय हमारे सामने प्रेमचंद का साहित्य था, कौशिक का था।आरंभ में बंकिम के उपन्यास पढ़े। शरतचंद्र को बाद में। प्रभातकुमार मुखोपाध्याय का कहानी संग्रह ' देशी और विलायती' १९३० के आसपास पढ़ा। उपन्यासों में बंकिम के उपन्यास १९३० में ही पढ़ डाले। 'आनंदमठ', 'देवी चौधरानी' और एक राजस्थानी थीम पर लिखा हुआ उपन्यास, उसी समय पढ़ा था। 
तिवारी जी: कया यही लेखक आपके लेखन के आदर्श रहे ? 
नागर जी: नहीं, कोई आदर्श नहीं। केवल आनंद था पढ़ने का। सबसे पहले कविता फूटी साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में । लाठीचार्ज हुआ था। इस अनुभव से ही पहली कविता फूटी.' कब लौं कहाँ लाठी खाय'। इसे ही लेखन का आरंभ मानिए।

(1) नाम लिखिए-     (2)

(i)

(ii)

(2) लिखिए-     (2)

  1. लेखक ने शुरू में इन्हें पढ़ा ______।
  2. नागर जी के सामने इनका साहित्य था ______।

(3) गद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए-    (2)

  1. लिंग परिवर्तन
    1. पितामही - ______
    2. सहेली - ______
  2. परिच्छेद से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।

(4) 'वाचन व्यक्ति विकास का सोपान है' अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
Chapter: [2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
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निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

जहाँ कोयल की मीठी वाणी सबका मन मोह लेती है, वहीं कौए को कर्कश आवाज किसी को अच्छी नहीं लगती । मधुर वचन न केवल सुनने वाले को, बल्कि बोलने वाले को भी आत्मिक शांति प्रदान करतें हैं। मनुष्य अपनी सद्भावनाओं का अधिकांश प्रदर्शन वचनों द्वारा ही करता है। मधुर वचन तप्त और दुःखी व्यक्ति का सही और सच्चा उपचार हैं। सहानुभूति के कुछ शब्द उसे इतना सुख देते हैं जितना संसार का कोई धनकोष नहीं दे पाता। मधुरभाषी शीघ्र ही सबका मित्र बन जाता है। लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। यहाँ तक कि पराए भी अपने बन जाते हैं। इससे समाज में पारस्परिक सौहार्द की भावना पैदा होती है, लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और श्रद्धा का आधार भी मधुर वाणी ही है। मधुर वचन किसी के मन को ठेस नहीं पहुँचाते, बल्कि दूसरे के क्रोध को शांत करने में सहायक होते हैं। मधुर वाणी में ऐसा आकर्षण है जो बिना रस्सी के सबको बाँध लेती है। अतः याद रखना चाहिए-

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए।
औरन को सीतल करे, आपहूँ सीतल होए॥

(1) उत्तर लिखिए-    (2)

गद्यांश के आधार पर मधुर वचन की विशेषताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) “शब्द शस्त्र के समान होते हैं उनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए" वचन पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

बिना मजदूरी के पेट भर भात पर काम करने वाला कारीगर ! दूध में कोई मिंठाई न मिले तो कोई बात नहीं किन्तु बात में जरा भी झाला बह नहीं बरदाश्त कर सकता। 

'सिरचन को लोक चटोर भी समझते हैं। तली बघारी हुई तरकारी, दही की कढ़ी , मलाईवाला दूध, इन सबका प्रबंध पहले कर लो, 'तब सिरचन को बुलाओ, दुम हिलाता हुआ हाजिर हो जाएगा। खाने-पीने में चिकनाई की कमी हुई कि काम की सारी चिकनाई खत्म ! काम अधूरा रखकर उठ खड़ा होगा- 'आज तो अब अधकपाली दर्द से माथा टनटना रहा हैं थोड़ासा रह गया है, किसी दिन आकर पूरा कर दूँगा।'' किसी दिन' माने कभी नहीं! 

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें'सिरचन के सिवा गाँव में ओर कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग। बेकामका काम जिसकी मजदूरी में अनाज या पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। पेट भर खिला दो, काम पूरा होने पर एकाध पूराना- धुराना कपड़ादेकर विदा करो। वह कुछ भी नहीं बोलेगा।....

(1) लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित सिरचन की पसंद की चीजें-

  1. ____________
  2. ____________

(2) 'हस्तकला को बढ़ावा मिलना चाहिए' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

अजी क्या कहिए, हाँ क्या कहिए।
जिस मिट्टी में लक्ष्मीबाई जी, जनमी थीं झाँसी की रानी।
रजिया सुलताना, दुर्गावती, जो खूब लड़ी थीं मर्दानी।
जनमी थी बीबी चाँद जहाँ, पद्मिनी के जौहर की ज्वाला।
सीता, सावित्री की धरती, जनमी ऐसी-ऐसी बाला।
गर डींग जनाब उड़ाएँगे, तो मजबूरन ताने सहिए, ताने सहिए, ताने सहिए।
हम उस धरती की लड़की हैं...
यों आप खफा क्यों होती हैं, टंटा काहे का आपस में।
हमसे तुम या तुमसे हम बढ़-चढ़कर क्या रक्खा इसमें।

(1) सूचनानुसार लिखिए-  (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें लड़ाई का संदर्भ है।
    __________________
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें जौहर का संदर्भ हैं।
    __________________

(2) 'देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
Chapter: [2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

'एक दिन तुम्हारे बाबू जी ने दुनिया की मुसीबतों और मनुष्य की मजबूरियों को समझते हुए जब हमसे गहनों की माँग की तों क्षण भर के लिए हमें कुछ वैसा लगा और गहना देने में तनिक हिचकिचाहट महसूस हुई, पर यह सोचा कि उनकी प्रसन्नता में हमारी खुशी है, हमने गहने दे दिए। केवल टीका, नथुनी, बिछिया, नथ रख लिए थे। वे हमारे सुहाग वाले गहने थे। उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, पर दूसरे दिन वे अपनी पीड़ा न रोक सके। कहने लगे- “तुम जब मिर्जापुर जाओगी और लोग गहनों के संबंध पूछेंगे तो क्या कहोगी ?

(1) नाम लिखिए -     (2)

(i)

(ii)

(2) 'पीड़ा' शब्द के दो समानार्थी शब्द लिखिए -   (2)

  1. ______
  2. ______

(3) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए-    

  1. प्रत्यययुक्तं शब्द -   (1)

    1. ______
    2. ______
  2. ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता -  (1)
    1. ______
    2. ______

(4) बाबू जी की चरित्रगत विशेषताओं पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार प्रकट करें।  (2)

[2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
Chapter: [2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आश्रम किसी एक धर्म से चिपका नहीं होगा। सभी धर्म आश्रम को मान्य होंगे, अत: सामान्य सदाचार, भक्ति तथा सेवा का ही वातावरण रहेगा। आश्रम में स्वावलंबन हो सके उतना ही रखना चाहिए। सादगी का आग्रह होना चाहिए। आरम्भ में उद्योग या पढ़ाई की व्यवस्था भले ही न हो सके, लेकिन आगें चलकर उपयोगी उद्योग सिखाए जाएँ, पढ़ाई भी आसान हों। आश्रम शिक्षा संस्था नहीं होगी, लेकिन कलह और कुढ़न से मुक्त स्वतन्त्र वातावरण जहाँ हो ऐसा मानवतापूर्ण आश्रय स्थान होगा, जहाँ परेशान महिलाएँ बेखटके अपने 'खर्च से रह सकें और अपने जीवन का सदुपयोग पवित्र सेवा में कर सकें। ऐसा आसान आदर्श रखा हो और व्यवस्था पर समिति का झंझट न हो तो बहुत सुंदर तरीके से चला सके ऐसा एक बड़ा काम होंगा। उनके उपर ऐसा बोझ नहीं आएगा जिससे कि उन्हें परेशानी हो।

(1) आकृति पूर्ण कीजिए-     (2)

(2) उत्तर लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित आश्रम की विशेषताएँ:

  1. ______
  2. ______

(3) (i) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में प्रयुक्त विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए-    (1)

  1. सदुपयोग - ______
  2. सादगी - ______

(ii) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-   (1)

  1. किसी संस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए गठित संगठन - ______
  2. अपना काम स्वयं करना - ______

(4) अपने देखे हुए किसी आश्रम की व्यवस्था पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)

[2.07] महिला आश्रम
Chapter: [2.07] महिला आश्रम
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आज संपूर्ण विश्व में एक धर्म दूसरे धर्म का दुश्मन बन बैठा है। धर्म का उद्देश्य सिर्फ मानवता की रक्षा करना है। कर्म, भक्ति, ज्ञान इनके त्रिरत हैं। इनमें से किसी एक के न होने पर धर्म को सही अर्थ में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। आज धर्म के नाम पर विभाजन, संप्रदायवाद, सामाजिक बैर आम हैं। धर्म किसी से बैर करना नहीं सिखाता। धर्म सिर्फ जोड़ता है। धर्म का आश्रय लेकर आज कुछ स्वार्थी लोग कुछ लोगों को पथश्रष्ट कर रहे हैं। हमें कबीर की उक्ति हमेशा याद रखनी चाहिए-

'कांकड़ पाथर जोड़ के मस्जिद लयी बनाय।।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।

(1) उत्तर लिखिए-

धर्म की विशेषताएँ लिखिए।     (2)

  1. ____________
  2. ____________

(2) धर्म विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए-  (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

यह बताओ तुम्हारे नोट कहाँ हैं ?
परीक्षा से एक महीने पहले करूँगा तैयार
वे गरजकर बोले, हमारा मतलब आपकी मुद्रा से है
मैं लरज कर बोला,
मुद्राए आप मेरे मुख पर देख लीजिए,
वे खड़े होकर कुछ सोचने लगे
'फिर शयन कक्ष में घुस गए
और फटे हुए तकिये की रुई नोचने लगे
उन्होंने टूटी अलमारी को खोला
रसोई की खाली पीपियों को टटोला
बच्चों की गुल्लक तक देख डाली
पर सब में मिला एक ही तत्व खाली:
'कनस्तरों को, मटकों को ढूँढा सब में मिला शुन्य-ब्रह्मांड ।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए।   (2)

(2) (i) ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हो-   (1)

  1. गरजना - ______
  2. सिक्का - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए-  (1)

बच्चों की गुल्लक तक देख डाली।

(3) प्रस्तृत हास्य-व्यंग्य का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए ।  (2)

[2.04] छापा
Chapter: [2.04] छापा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

        उस दिन शाम के वक्‍त झील किनारे टहल रहे थे। एक भुट्‌टेवाला आया और बोला- ‘‘साब, भुट्‌टा लेंगे। गरम-गरम भूनकर मसाला लगाकर दूँगा। सहज ही पूछ लिया- ‘‘कितने का है?’’ ‘‘पाँच रुपये का।’’ क्‍या? पाँच रुपये में एक भुट्‌टा। हमारे शहर में तो दो रुपये में एक मिलता है, तुम तीन ले लो।’’ ‘‘नहीं साब, ‘‘पाँच से कम में तो नहीं मिलेगा ...’’ ‘‘तो रहने दो ...’’ हम आगे बढ़ गए।’’ एकाएक पैर ठिठक गए और मन में विचार उठा कि हमारे जैसे लोग पहाड़ों पर घूमने का शौक रखते हैं, हजारों रुपये खर्च करते हैं, अच्छे होटलों में रुकते हैं जो बड़ी दूकानों में बिना दाम पूछे खर्च करते हैं, पर गरीब से दो रुपये के लिए झिक-झिक करते हैं, कितने कंगाल हैं हम! उल्‍टे कदम लौटा और बीस रुपये में चार भुट्‌टे खरीदकर चल पड़ा अपनी राह। मन अब सुकून अनुभव कर रहा था।

(1) नाम लिखिए- (2)

(i) 

(ii)

(2) लिखिए- (2)

  1. महत्वपूर्ण जगह का नाम।
  2. लेखक ने बीस रुपये में कितने भुट्‌टे खरीदे।

(3) गद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए- (2)

(i) प्रत्यययुक्त शब्द: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता है- (1)

  1. ______
  2. ______

(4) फुटपाथ पर सामान बेचने वाले की दशा पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.02] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
Chapter: [2.02] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दीख पड़े थे। वह सोचने लगी-हाय! कितनी निर्दयी हूँ। जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान ! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो ! आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इंशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए, परन्तु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाए, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी । केवल इसी कारण कि, वह वृद्धा असहाय है।

(1) लिखिए -  (2)

गद्यांश में उल्लेखित रूप की मानसिकताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) रूपा की चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर 25 - 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)

[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

करते जाओ
पाने की मत सोचो
जीवन सारा।

जीवन नैया
मैंझधार में डोले,
सँभाले कौन ?

रंग-बिरंगे
रंग-संग लेकर
आया फागुन।

काँटों के बीच
खिलखिलाता फूल
देता प्रेरणा।

(1) सूचनानुसार लिखिए-   (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें शिक्षा है - ______
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें प्रेरणा है - ______

(2) कर्म ही जीवन है, अपने विचार 25 - 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है।

            परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है-

रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव।
देख पराई चूपड़ी यह ललचावै जीव।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप

  1. ______
  2. ______

(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी History and Political Science
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी Marathi - Composite [[मराठी - संयुक्त (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी Sanskrit (Second Language) [संस्कृत (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी Sanskrit - Composite [संस्कृत - संयुक्त (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी Science and Technology 1
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (English Medium) इयत्ता १० वी Science and Technology 2
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