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SSC (English Medium) इयत्ता १० वी - Maharashtra State Board Question Bank Solutions for Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

अजी क्या कहिए, हाँ क्या कहिए।
जिस मिट्टी में लक्ष्मीबाई जी, जनमी थीं झाँसी की रानी।
रजिया सुलताना, दुर्गावती, जो खूब लड़ी थीं मर्दानी।
जनमी थी बीबी चाँद जहाँ, पद्मिनी के जौहर की ज्वाला।
सीता, सावित्री की धरती, जनमी ऐसी-ऐसी बाला।
गर डींग जनाब उड़ाएँगे, तो मजबूरन ताने सहिए, ताने सहिए, ताने सहिए।
हम उस धरती की लड़की हैं...
यों आप खफा क्यों होती हैं, टंटा काहे का आपस में।
हमसे तुम या तुमसे हम बढ़-चढ़कर क्या रक्खा इसमें।

(1) सूचनानुसार लिखिए-  (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें लड़ाई का संदर्भ है।
    __________________
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें जौहर का संदर्भ हैं।
    __________________

(2) 'देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
Chapter: [2.06] हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

'एक दिन तुम्हारे बाबू जी ने दुनिया की मुसीबतों और मनुष्य की मजबूरियों को समझते हुए जब हमसे गहनों की माँग की तों क्षण भर के लिए हमें कुछ वैसा लगा और गहना देने में तनिक हिचकिचाहट महसूस हुई, पर यह सोचा कि उनकी प्रसन्नता में हमारी खुशी है, हमने गहने दे दिए। केवल टीका, नथुनी, बिछिया, नथ रख लिए थे। वे हमारे सुहाग वाले गहने थे। उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, पर दूसरे दिन वे अपनी पीड़ा न रोक सके। कहने लगे- “तुम जब मिर्जापुर जाओगी और लोग गहनों के संबंध पूछेंगे तो क्या कहोगी ?

(1) नाम लिखिए -     (2)

(i)

(ii)

(2) 'पीड़ा' शब्द के दो समानार्थी शब्द लिखिए -   (2)

  1. ______
  2. ______

(3) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए-    

  1. प्रत्यययुक्तं शब्द -   (1)

    1. ______
    2. ______
  2. ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता -  (1)
    1. ______
    2. ______

(4) बाबू जी की चरित्रगत विशेषताओं पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार प्रकट करें।  (2)

[2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
Chapter: [2.05] ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
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पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आश्रम किसी एक धर्म से चिपका नहीं होगा। सभी धर्म आश्रम को मान्य होंगे, अत: सामान्य सदाचार, भक्ति तथा सेवा का ही वातावरण रहेगा। आश्रम में स्वावलंबन हो सके उतना ही रखना चाहिए। सादगी का आग्रह होना चाहिए। आरम्भ में उद्योग या पढ़ाई की व्यवस्था भले ही न हो सके, लेकिन आगें चलकर उपयोगी उद्योग सिखाए जाएँ, पढ़ाई भी आसान हों। आश्रम शिक्षा संस्था नहीं होगी, लेकिन कलह और कुढ़न से मुक्त स्वतन्त्र वातावरण जहाँ हो ऐसा मानवतापूर्ण आश्रय स्थान होगा, जहाँ परेशान महिलाएँ बेखटके अपने 'खर्च से रह सकें और अपने जीवन का सदुपयोग पवित्र सेवा में कर सकें। ऐसा आसान आदर्श रखा हो और व्यवस्था पर समिति का झंझट न हो तो बहुत सुंदर तरीके से चला सके ऐसा एक बड़ा काम होंगा। उनके उपर ऐसा बोझ नहीं आएगा जिससे कि उन्हें परेशानी हो।

(1) आकृति पूर्ण कीजिए-     (2)

(2) उत्तर लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित आश्रम की विशेषताएँ:

  1. ______
  2. ______

(3) (i) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में प्रयुक्त विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए-    (1)

  1. सदुपयोग - ______
  2. सादगी - ______

(ii) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-   (1)

  1. किसी संस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए गठित संगठन - ______
  2. अपना काम स्वयं करना - ______

(4) अपने देखे हुए किसी आश्रम की व्यवस्था पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)

[2.07] महिला आश्रम
Chapter: [2.07] महिला आश्रम
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आज संपूर्ण विश्व में एक धर्म दूसरे धर्म का दुश्मन बन बैठा है। धर्म का उद्देश्य सिर्फ मानवता की रक्षा करना है। कर्म, भक्ति, ज्ञान इनके त्रिरत हैं। इनमें से किसी एक के न होने पर धर्म को सही अर्थ में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। आज धर्म के नाम पर विभाजन, संप्रदायवाद, सामाजिक बैर आम हैं। धर्म किसी से बैर करना नहीं सिखाता। धर्म सिर्फ जोड़ता है। धर्म का आश्रय लेकर आज कुछ स्वार्थी लोग कुछ लोगों को पथश्रष्ट कर रहे हैं। हमें कबीर की उक्ति हमेशा याद रखनी चाहिए-

'कांकड़ पाथर जोड़ के मस्जिद लयी बनाय।।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।

(1) उत्तर लिखिए-

धर्म की विशेषताएँ लिखिए।     (2)

  1. ____________
  2. ____________

(2) धर्म विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए-  (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

यह बताओ तुम्हारे नोट कहाँ हैं ?
परीक्षा से एक महीने पहले करूँगा तैयार
वे गरजकर बोले, हमारा मतलब आपकी मुद्रा से है
मैं लरज कर बोला,
मुद्राए आप मेरे मुख पर देख लीजिए,
वे खड़े होकर कुछ सोचने लगे
'फिर शयन कक्ष में घुस गए
और फटे हुए तकिये की रुई नोचने लगे
उन्होंने टूटी अलमारी को खोला
रसोई की खाली पीपियों को टटोला
बच्चों की गुल्लक तक देख डाली
पर सब में मिला एक ही तत्व खाली:
'कनस्तरों को, मटकों को ढूँढा सब में मिला शुन्य-ब्रह्मांड ।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए।   (2)

(2) (i) ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हो-   (1)

  1. गरजना - ______
  2. सिक्का - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए-  (1)

बच्चों की गुल्लक तक देख डाली।

(3) प्रस्तृत हास्य-व्यंग्य का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए ।  (2)

[2.04] छापा
Chapter: [2.04] छापा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

        उस दिन शाम के वक्‍त झील किनारे टहल रहे थे। एक भुट्‌टेवाला आया और बोला- ‘‘साब, भुट्‌टा लेंगे। गरम-गरम भूनकर मसाला लगाकर दूँगा। सहज ही पूछ लिया- ‘‘कितने का है?’’ ‘‘पाँच रुपये का।’’ क्‍या? पाँच रुपये में एक भुट्‌टा। हमारे शहर में तो दो रुपये में एक मिलता है, तुम तीन ले लो।’’ ‘‘नहीं साब, ‘‘पाँच से कम में तो नहीं मिलेगा ...’’ ‘‘तो रहने दो ...’’ हम आगे बढ़ गए।’’ एकाएक पैर ठिठक गए और मन में विचार उठा कि हमारे जैसे लोग पहाड़ों पर घूमने का शौक रखते हैं, हजारों रुपये खर्च करते हैं, अच्छे होटलों में रुकते हैं जो बड़ी दूकानों में बिना दाम पूछे खर्च करते हैं, पर गरीब से दो रुपये के लिए झिक-झिक करते हैं, कितने कंगाल हैं हम! उल्‍टे कदम लौटा और बीस रुपये में चार भुट्‌टे खरीदकर चल पड़ा अपनी राह। मन अब सुकून अनुभव कर रहा था।

(1) नाम लिखिए- (2)

(i) 

(ii)

(2) लिखिए- (2)

  1. महत्वपूर्ण जगह का नाम।
  2. लेखक ने बीस रुपये में कितने भुट्‌टे खरीदे।

(3) गद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए- (2)

(i) प्रत्यययुक्त शब्द: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता है- (1)

  1. ______
  2. ______

(4) फुटपाथ पर सामान बेचने वाले की दशा पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.02] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
Chapter: [2.02] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दीख पड़े थे। वह सोचने लगी-हाय! कितनी निर्दयी हूँ। जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान ! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो ! आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इंशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए, परन्तु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाए, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी । केवल इसी कारण कि, वह वृद्धा असहाय है।

(1) लिखिए -  (2)

गद्यांश में उल्लेखित रूप की मानसिकताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) रूपा की चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर 25 - 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (2)

[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

करते जाओ
पाने की मत सोचो
जीवन सारा।

जीवन नैया
मैंझधार में डोले,
सँभाले कौन ?

रंग-बिरंगे
रंग-संग लेकर
आया फागुन।

काँटों के बीच
खिलखिलाता फूल
देता प्रेरणा।

(1) सूचनानुसार लिखिए-   (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें शिक्षा है - ______
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें प्रेरणा है - ______

(2) कर्म ही जीवन है, अपने विचार 25 - 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है।

            परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है-

रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव।
देख पराई चूपड़ी यह ललचावै जीव।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप

  1. ______
  2. ______

(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाई

लछमन जैसी चौकी देकर जिन काँटों ने जान बचाई

इनको पहिला हक आता है चाहे मुझको नोचें-तोड़ें

चाहे जिस मालिन से मेरी पँखुरियों के रिश्ते जोड़ें

ओ मुझपर मँड़राने वालो मेरा मोल लगाने वालो

जो मेरा संस्‍कार बन गई वो सौगंध नहीं बेचूँगा।

अपनी गंध नहीं बेचूँगा।।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए- (2)

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए- (1)

  1. गंध - ______
  2. हक - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए- (1)

मेरा मोल लगाने वालो।

(3) प्रस्तुत पद्यांश की किन्हीं दो पंक्तियों का भावार्थ लिखिए- (2)

[2.08] अपनी गंध नहीं बेचूँगा
Chapter: [2.08] अपनी गंध नहीं बेचूँगा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्‍सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्‍तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें सिरचन के सिवा गाँव में और कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग।

(1) लिखिए- (2)

ग्रामीण समाज की हस्तनिर्मित वस्तुएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) ग्रामीण हस्तकला पर 25-30 शब्दों में प्रकाश डालिए। (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

             हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है-

रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय।
सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहैं कोय।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

समाज में लोगों की विशेषताएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

वे गरजकर बोले, हमारा मतलब आपकी मुद्रा से है

मैं लरजकर बोला,

मुद्राएँ आप मेरे मुख पर देख लीजिए,

वे खड़े होकर कुछ सोचने लगे

फिर शयन कक्ष में घुस गए

और फटे हुए तकिये की रूई नोचने लगे

उन्होंने टूटी अलमारी को खोला

रसोई की खाली पीपियों को टटोला

बच्चों की गुल्‍लक तक देख डाली

पर सब में मिला एक ही तत्‍त्‍व खाली...

कनस्‍तरों को, मटकों को ढूॅंढ़ा सब में मिला शून्य-ब्रह्मांड

देखकर मेरे घर में ऐसा अरण्यकांड

उनका खिला हुआ चेहरा मुरझा गया

और उनके बीस सूची हृदय में

रौद्र की जगह करुण रस समा गया,

वे बोले, क्षमा कीजिए, हमें किसी ने गलत सूचना दे दी

अपनी असफलता पर वे मन ही मन पछताने लगे।

(1) पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए- (2)

(i) तकिया गुल्लक
(ii) बच्चों शून्य
    रूई
  1. ______
  2. ______

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए- (1)

  1. मुद्रा -
  2. टटोला - 
  3. सूचना - 
  4. असफलता -

(ii) पद्यांश में आए ‘मुद्रा’ शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए- (1)

  1. ______
  2. ______

(3) अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.04] छापा
Chapter: [2.04] छापा
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           मानू पान सजाकर बाहर बैठकखाने में भेज रही थी। चुपके से पान का एक बीड़ा सिरचन को देती हुई इधर-उधर देखकर बोली ‘‘सिरचन दादा, काम-काज का घर! पाँच तरह के लोग पाँच किस्‍म की बात करेंगे। तुम किसी की बात पर कान मत दो।’’ सिरचन ने मुस्‍कराकर पान का बीड़ा मुँह में ले लिया। चाची अपने कमरे से निकल रही थी। सिरचन को पान खाते देखकर अवाक् हो गई। सिरचन ने चाची को अपनी ओर अचरज से घूरते देखकर कहा, ‘‘छोटी चाची, जरा अपनी डिबिया का गमकौआ जर्दा खिलाना। बहुत दिन हुए ...।’’

           चाची कई कारणों से जली-भुनी रहती थी सिरचन से। गुस्‍सा उतारने का ऐसा मौका फिर नहीं मिल सकता। झनकती हुई बोली, ‘‘तुम्‍हारी बढ़ी हुई जीभ में आग लगे। घर में भी पान और गमकौआ जर्दा खाते हो?... चटोर कहीं के!’’ मेरा कलेजा धड़क उठा... हो गया सत्‍यानाश! बस, सिरचन की उँगलियों में सुतली के फंदे पड़ गए। मानो, कुछ देर तक वह चुपचाप बैठा पान को मुँह में घुलाता रहा फिर अचानक उठकर पिछवाड़े पीक थूक आया। अपनी छुरी, हँसिया वगैरह समेट-सँभालकर झोले में रखे। टँगी हुई अधूरी चिक पर एक निगाह डाली और हनहनाता हुआ आँगन से बाहर निकल गया।

(1) लिखिए- (2)

मोनू ने सिरचन से क्या कहा?

  1. ______
  2. ______

(2) सिरचन ने अपनी बेइज्जती महसूस करने के बाद क्‍या कदम उठाया? इस विषय पर 25-30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[1.1] ठेस (पूरक पठन)
Chapter: [1.1] ठेस (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मुझको मेरा अंत पता है पँखुरी-पँखुरी झर जाऊँगा

लेकिन पहिले पवन परी संग एक-एक के घर जाऊँगा

भूल-चूक की माफी लेगी सबसे मेरी गंध कुमारी

उस दिन ये मंडी समझेगी किसको कहते हैं खुद्दारी

बिकने से बेहतर मर जाऊँ अपनी माटी में झर जाऊँ

मन ने तन पर लगा दिया जो वो प्रतिबंध नहीं बेचूँगा।

(1) सूचनानुसार लिखिए- (2)

  1. ऐसी पंक्ति जिसमें आत्मसम्मान की बात है - ______
  2. ऐसी पंक्ति जिसमें माफी माँगने का संदर्भ है - ______

(2) जीवन की सार्थकता पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[2.08] अपनी गंध नहीं बेचूँगा
Chapter: [2.08] अपनी गंध नहीं बेचूँगा
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

         आम तौर से माना जाता है कि रुपया, नोट या सोना-चाँदी का सिक्‍का ही संपत्‍ति है, लेकिन यह ख्याल गलत है क्‍योंकि ये तो संपत्‍ति के माप-तौल के साधन मात्र हैं। संपत्‍ति तो वे ही चीजें हो सकती हैं जो किसी-न-किसी रूप में मनुष्‍य के उपयोग में आती हैं। उनमें से कुछ ऐसी हैं जिनके बिना मनुष्‍य जिंदा नहीं रह सकता एवं कुछ, सुख-सुविधा और आराम के लिए होती हैं। अन्न, वस्‍त्र और मकान मनुष्‍य की प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं, जिनके बिना उसकी गुजर-बसर नहीं हो सकती। इनके अलावा दूसरी अनेक चीजें हैं जिनके बिना मनुष्‍य रह सकता है।

         प्रश्न उठता है कि संपत्‍तिरूपी ये सब चीजें बनती कैसे हैं? सृष्‍टि में जो नानाविध द्रव्य तथा प्राकृतिक साधन हैं, उनको लेकर मनुष्‍य शरीर श्रम करता है, तब यह काम की चीजें बनती हैं। अतः संपत्‍ति के मुख्य साधन दो हैं: सृष्‍टि के द्रव्य और मनुष्‍य का शरीर श्रम। यंत्र से कुछ चीजें बनती दिखती हैं पर वे यंत्र भी शरीर श्रम से बनते हैं और उनको चलाने में भी प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष शरीर श्रम की आवश्यकता होती है। केवल बौद्‌धिक श्रम से कोई उपयोग की चीज नहीं बन सकती अर्थात बिना शरीर श्रम के संपत्‍ति का निर्माण नहीं हो सकता।

(1) आकृति में दिए गए शब्दों का सूचना के अनुसार वर्गीकरण कीजिए: (2)

(2) उत्तर लिखिए: (2)

गद्यांश में उल्लेखित ख्याल ख्याल गलत होने का कारण
________________ ________________

(3) सूचनाओं के अनुसार कृति पूर्ण कीजिए: (2)

(i) गद्यांश में प्रयुक्त शब्दयुग्म लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)

चीजें बनती दिखती हैं।

(4) ‘शारीरिक श्रम का महत्त्व’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[2.03] श्रम साधना
Chapter: [2.03] श्रम साधना
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

      मधुरता सत्य का अनुपान है और मितता उसका पथ्य है। जिसे हम सम्यक वाणी कहते हैं; वह सत्य, मित और मधुर होती है और वही परिणामकारक भी होती है। समाज का हित किस बात में है, समझना कभी कठिन हो सकता है। परंतु सम्यक वाणी से ही  वह सधेगा, यह किसी भी आदमी के लिए समझना कठिन नहीं होना चाहिए।

      परंतु यही आज भारी हो रहा है। समाजहित के नाम पर कार्यकर्ताओं की वाणी दूषित हो गई हैं, अर्थात मन ही दूषित हो गया है। फिर कृति कैसे भूषित हो सकती है?

      आज लेखन व भाषण के साधन सुलभतम हो गए हैं। परंतु शायद इसी कारण सभ्य वाणी दुर्लभ हो गई है। सभ्य वाणी को खोकर सुलभ साधनों की प्राप्ति करना यानी कवि की भाषा में नेत्र बेचकर चित्र खरीदने जैसा है।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी : मनुष्य को प्राप्त वरदान’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई।।

नव पल्‍लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिले बिबेका।।

अर्क-जवास पात बिनु भयउ। जस सुराज खल उद्यम गयऊ।।

खोजत कतहुँ मिलइ नहिं धूरी। करइ क्रोध जिमि धरमहिं दूरी।।

ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी।।

निसि तम घन खद्योत बिराजा। जनु दंभिन्ह कर मिला समाजा।।

कृषी निरावहिं चतुर किसाना। जिमि बुध तजहिं मोह-मद-माना।।

देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहिं पाइ जिमि धर्म पराहीं।।

विविध जंतु संकुल महि भ्राजा। प्रजा बाढ़ जिमि पाई सुराजा।।

जहँ-तहँ रहे पथिक थकि नाना। जिमि इंद्रिय गन उपजे ग्‍याना।।

(1) परिणाम लिखिए: (2)

  1. कलियुग आने से ______
  2. सुराज होने से ______
  3. बरसात के आने से ______
  4. क्रोध के आने से ______

(2) पद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए: (2)

(i) ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन से रूप नहीं बदलता: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हों: (1)

  1. मेंढक = ______
  2. वृक्ष = ______

(3) उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। (2)

[2.01] बरषहिं जलद
Chapter: [2.01] बरषहिं जलद
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

रूपा उस समय कार्य भार से उद्‌विग्‍न हो रही थी। कभी इस कोठे में जाती, कभी उस कोठे में, कभी कड़ाह के पास आती, कभी भंडार में जाती। किसी ने बाहर से आकर कहा- ‘महाराज ठंडाई माँग रहे हैं।’ ठंडाई देने लगी। आदमी ने आकर पूछा- ‘अभी भोजन तैयार होने में कितना विलंब है? जरा ढोल-मंजीरा उतार दो।’ बेचारी अकेली स्‍त्री दौड़ते-दौड़ते व्याकुल हो रही थी, झुँझलाती थी, कुढ़ती थी, परंतु क्रोध प्रकट करने का अवसर न पाती थी। भय होता, कहीं पड़ोसिनें यह न कहने लगें कि इतने में उबल पड़ीं। प्यास से स्‍वयं कंठ सूख रहा था। गरमी के मारे फुँकी जाती थी परंतु इतना अवकाश भी नहीं था कि जरा पानी पी ले अथवा पंखा लेकर झले। यह भी खटका था कि जरा आँख हटी और चीजों की लूट मची।
  1. संजाल पूर्ण कीजिए:      [2]

  2. ‘कर्तव्यनिष्ठा और कार्यपूर्ति’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]
[2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
Chapter: [2.1] बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

मन की पीड़ा
छाई बन बादल
बरसीं आँखें।

चलतीं साथ
पटरियाँ रेल की
फिर भी मौन।

सितारे छिपे
बादलों की ओट में
सूना आकाश।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

  1. मौन बनी - ______
  2. छिपे हुए - ______
  3. बरसीं हुईं - ______
  4. सूना - ______

(2) ‘मन के जीते जीत है’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

[1.04] मन (पूरक पठन)
Chapter: [1.04] मन (पूरक पठन)
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