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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियां कीजिए-
| देखकर जो विघ्न-बाधाओं को घबराते नहीं, रह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं, काम कितना ही कठिन हो किन्तु उकताते नहीं, भीड़ में चंचल बनें जो वीर दिखलाते नहीं, मानते जी की हैं, सुनते हैं सदा सबकी कही, जो मदद करते हैं अपनी इस जगत में आप ही |
(1) कृतियाँ पूर्ण कीजिए - (2)
| कर्मवीर की विशेषताएँ |
| 1. ____________ |
| 2. ____________ |
| 3. ____________ |
| 4. ____________ |
(2) अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
| आज शाम, वह बचपन के अपने कमरे में घुसा। लाईट ऑन की और कोने में रखे बक्से की ओर बढ़ गया। उसके बचपन का साथी उसका प्यार, लकड़ी का बड़ा-सा बकसा। वह जब भी यहाँ आता है, एक बार इस बक्से को खोलकर जरूर देखता है। सहज उसने इसे खोला।'छठी - सातवीं - आठवीं कक्षा के कोर्स की कुछ पुरानी किताबें, ज्योमेट्री बॉक्स, कीलवाले तलवों के फुटबॉल शूज, एन. सी.सी. की एक्स्ट्रा ड्रेस, पुराना फोटो एलबम और भी जाने क्या-क्या। बार-बार देखने पर भी इन चीजों को देखने आने की इच्छा मरती नहीं है। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए- (2)

(2) (i) गद्यांश में शब्द युग्म की जोड़ी लिखिए- ______ (1)
(ii) गद्यांश में प्रयुक्त दो समानार्थी शब्द लिखिए- (1)
______ × ______
(3) बचपन के कुछ अनुभव के बारे में 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
पहले बड़ी फिर छोटी, फिर उनसे छोटी के क्रम से बालिकाएँ मेरे संरक्षण में आ गईं। उन्हें देखने प्रायः उनकी दादी और कभी-कभी दादा भी प्रयाग आते रहे। तभी राजेंद्र बाबू की सहधर्मिणी के निकट संपर्क में आने का अवसर मिला। वे सच्चे अर्थ में धरती की पुत्री थीं। वे साध्वी, सरल, क्षमामयी, सबके प्रति ममतालु और असंख्य संबंधों की सूत्रधारिणी थीं। ससुराल में उन्होंने बालिकावधू के रूप में पदार्पण किया था। संभ्रांत जमींदार परिवार की परंपरा के अनुसार उन्हें घंटों सिर नीचा करके एकासन बैठना पड़ता था, परिणामतः उनकी रीढ़ की हड्डी इस प्रकार झुक गई कि युवती होकर भी वे सीधी खड़ी नहीं हो पाती थीं। बालिकाओं के संबंध में राजेंद्र बाबू का स्पष्ट निर्देश था कि वे सामान्य बालिकाओं के समान बहुत सादगी और संयम से रहें। वे खादी के कपड़े पहनती थीं, जिन्हें वे स्वयं ही धो लेती थीं। उनके साबुन-तेल आदि का व्यय भी सीमित था। कमरे की सफाई, झाड़-पोंछ, गुरुजनों की सेवा आदि भी उनके अध्ययन के आवश्यक अंग थे। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए : [2]

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: [1]
- बालक -
- धरती -
(ii) कृति पूर्ण कीजिए: [1]

(3) "सदा जीवन उच्च विचार" विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
जाको राखै साइयाँ, मारि न सक्कै कोय। नैनों अंतर आव तूँ, नैन झाँपि तोहिं लेवँ। लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल। |
(1) कारण लिखिए: [2]
| कवी प्रभु को आँखों में बंद करना चाहते हैं। |
| ↓ |
|
(2) अंतिम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। [2]
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गीत में प्रयुक्त क्रियारूप लिखिए:
- बाग-बगीचे, ताल-तलैया ______
- झूम-झूमकर मस्ती में तरु गीत ______
- मधुमास आस-विश्वास ______
- धरती ने ______
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प्रस्तुत गीत की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
| सोंधी-सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली, बादल बरस गया, धरती ने आँखें खोलीं। चारों ओर हुई हरियाली कहे मयूरा, सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा। |
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‘प्रतिभा जन्मजात होती है परंतु उसके पल्लवन हेतु उचित वातावरण की आवश्यकता होती है’ विषय पर भाषण का नमूना तैयार कीजिए।
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‘सरकारी ग्राम विकास योजना’ की जानकारी पढ़िए तथा इसके मुख्य मुद्दे बताइए।
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कृति पूर्ण कीजिए:
खोए हुए आदमी के गीत से प्रभावित होने वाले:

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ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
भविष्यवाणी
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ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
झमाझम बारिश
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ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
खुशहाली
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ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
गंधक
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‘मानवता ही सच्चा धर्म है’ पर अपने विचार लिखिए।
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परिच्छेद पर आधारित कृतियाँ:-
| भले ही आपने उसे अभी-अभी खरीदा हो और उसे खोलकर पढ़ना तो दूर पन्ने पलटकर भी न देखा हो; लेकिन आपके उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना अखबार सामने वाले के हाथों में होगा। अब आपकी स्थिति माँगने वालों की हो जाएगी और आप उत्सुकता से राह देखेंगे कि समाचारपत्र अब लौटे कि तब। तभी वे सज्जन एक जम्हाई लेकरउसे बेतरतीबी से मोड़ते हुए किसी दूसरे माँगने वाले की ओर इस तरह शान से बढ़ा देंगे मानो समाचारपत्र आपका नहीं; उनकी निजी संपत्ति हो। देखते-देखते समाचारपत्र के पन्ने एक-दूसरे से जुदा होकर पूरे डिब्बे के चक्कर काटने लगेंगे। मजे की बात यह है कि एक समाचारपत्र के कितने उपयोग हो सकते हैं, इसका अंदाज रेल की यात्रा करते समय ही लगाया जा सकता है। कोई ललित निबंध के तो कोई संपादकीय पन्ने से अपनी सीट झाड़ता नजर आएगा। कोई समाचारपत्र फैलाकर उसपर भोजन करता दिखाई पड़ेगा। बेचारे समाचारपत्र वाले ने भी कभी सोचा नहीं होगा कि उसके पत्र के इतने उपयोेग हो सकते हैं। |
प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:-

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परिच्छेद पर आधारित कृतियाँ:-
| भले ही आपने उसे अभी-अभी खरीदा हो और उसे खोलकर पढ़ना तो दूर पन्ने पलटकर भी न देखा हो; लेकिन आपके उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना अखबार सामने वाले के हाथों में होगा। अब आपकी स्थिति माँगने वालों की हो जाएगी और आप उत्सुकता से राह देखेंगे कि समाचारपत्र अब लौटे कि तब। तभी वे सज्जन एक जम्हाई लेकरउसे बेतरतीबी से मोड़ते हुए किसी दूसरे माँगने वाले की ओर इस तरह शान से बढ़ा देंगे मानो समाचारपत्र आपका नहीं; उनकी निजी संपत्ति हो। देखते-देखते समाचारपत्र के पन्ने एक-दूसरे से जुदा होकर पूरे डिब्बे के चक्कर काटने लगेंगे। मजे की बात यह है कि एक समाचारपत्र के कितने उपयोग हो सकते हैं, इसका अंदाज रेल की यात्रा करते समय ही लगाया जा सकता है। कोई ललित निबंध के तो कोई संपादकीय पन्ने से अपनी सीट झाड़ता नजर आएगा। कोई समाचारपत्र फैलाकर उसपर भोजन करता दिखाई पड़ेगा। बेचारे समाचारपत्र वाले ने भी कभी सोचा नहीं होगा कि उसके पत्र के इतने उपयोेग हो सकते हैं। |
लिखिए:

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समाचारपत्र की आवश्यकता के बारे में अपने विचार लिखिए।
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