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Science (Hindi Medium) इयत्ता १२ - CBSE Question Bank Solutions

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फ़िराक की गज़ल में अपना परदा खोलने से क्या आशय है?

[1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Chapter: [1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
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बाबा भीमराव आंबेडकर के अनुसार उनकी कल्पना का आदर्श समाज कैसा होना चाहिए? अपने शब्दों में अभिव्यक्त करें।

[1.18] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
Chapter: [1.18] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
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निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।

चिड़िया को लाख समझाओ
कि पिंजड़े के बाहर
धरती बड़ी है, निर्मम है,
वहाँ हवा में उसे
बाहर जाने का टोटा है
यहाँ चुग्गा मोटा है।
बाहर बहेलिये का डर है
यहाँ निर्भय कंठ स्वर है।
फिर भी चिड़िया मुक्ति का गाना गाएगी,
अपने जिस्म की गंध तक नहीं मिलेगी।

यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है,
पर पानी के लिए भटकना है,
यहाँ कटोरी में भरा जल गटकना है।
मारे जाने की आशंका से भरे होने पर भी
पिंजड़े से जितना अंग निकल सकेगा निकालेगी,
हर सू ज़ोर लगाएगी,
और पिंजरा टूट जाने या खुल जाने पर उड़ जाएगी।

(i) पिंजड़े के भीतर चिड़िया को क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं? (1)

(क) खाने की स्वतंत्रता, सम्मान और स्नेह
(ख) नीर, कनक, आवास और सुरक्षा
(ग) प्यार, पुरस्कार, भोजन और हवा
(घ) निश्चितता, निर्भयता, नियम और नीरसता

(ii) बाहर सुखों का अभाव और प्राणों का संकट होने पर भी चिड़िया मुक्ति ही क्यों चाहती है? (1)

(क) वह अपने परिवार से मिलना चाहती है।
(ख) वह आज़ाद जीवन जीना पसंद करती है।
(ग) वह जीवन से मुक्ति चाहती है।
(घ) वह लंबी उड़ान भरना चाहती है।

(iii) चिड़िया के समक्ष धरती को निर्मम बताने का मंतव्य है - (1)

(क) भयावह स्थिति उत्पन्न करना
(ख) छोटे जीव के प्रति दया भाव
(ग) बहेलिये से बचाव की प्रेरणा
(घ) जीवनोपयोगी वस्तुएँ जुटाने का संघर्ष दर्शाना

(iv) पद्यांश का मूल प्रतिपाद्य क्या है? (1)

(क) पिंजरे में रखने वालों को सही राह दिखाना
(ख) पिंजरे के भीतर और बाहर की दुनिया दिखाना
(ग) पिंजरे के पक्षी की उड़ान और दर्द से परिचित कराना
(घ) पिंजरे के पक्षी के माध्यम से स्वतंत्रता का महत्त्व बताना

(v) कवि के संबंध में इनमें से सही है कि वह - (1)

(क) प्रकृति के प्रति सचेत हैं
(ख) चिड़िया की सुरक्षा चाहते हैं
(ग) आज़ादी के समर्थक हैं
(घ) अन्न-जल की उपयोगिता बताते हैं

[6] अपठित विभाग
Chapter: [6] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।

हैं जन्म लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही-सी चाँदनी है डालता।

मेह उन पर है बरसता एक-सा,
एक सी उन पर हवाएँ हैं बहीं
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।

छेदकर काँटा किसी की उंगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर वसन
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भैंवर का है भेद देता श्याम तन।

फूल लेकर तितलियों को गोद में
भँवर को अपना अनूठा रस पिला,
निज सुगंधों और निराले ढंग से
है सदा देता कली का जी खिला।

है खटकता एक सबकी आँख में
दूसरा है सोहता सुर शीश पर,
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।

(i) प्रस्तुत काव्यांश किससे संबंधित है? (1)

(क) फूल और तितलियों से
(ख) फल और पौधे से
(ग) पौधे और चाँदनी से
(घ) बड़प्पन की पहचान से

(ii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) सद्गुणों के कारण ही मानुस प्रेम का पात्र बनता है।
(II) परिवेशगत समानता सदैव अव्यवस्था को जन्म देती है।
(III) भौगोलिक परिस्थितियाँ प्राकृतिक भिन्नता का कारण हैं।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(iii) इस काव्यांश से हमें क्या सीख मिलती है? (1)

(क) मनुष्य के कर्म उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं।
(ख) समान परिवेश में रहते हुए मनुष्य समान आदर पाते हैं।
(ग) किसी भी कुल में जन्म लेने से ही मनुष्य बड़ा हो सकता है।
(घ) समान पालन-पोषण होने पर अलग व्यक्तियों के स्वभाव समान होते हैं।

(iv) ‘फाड़ देता है किसी का वर वसन’ में ‘वसन’ शब्द का अर्थ है - (1)

(क) व्यसन
(ख) वस्त्र
(ग) वास
(घ) वासना

(v) कवितानुसार फूल निम्न में से कौन-सा कार्य नहीं करता? (1)

(क) भँवरों को अपना रस पिलाता है।
(ख) तितलियों को अपनी गोद में खिलाता है।
(ग) फल बनकर पशु-पक्षियों और मनुष्यों का पेट भरता है।
(घ) सुरों के शीश पर सोहता है।

[6] अपठित विभाग
Chapter: [6] अपठित विभाग
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दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:

कुश्ती कोई भी लड़े
ढोल बजाता है सिमरू ही
जिसके सधे हाथ
भर देते हैं जोश पूरे दंगल में
उछलने लगती है मिट्टी पूरे अखाड़े की
ताक धिना-धिन... ताक धिना-धिन
झाँकने लगते हैं लोग
एक-दूसरे के कन्धों के ऊपर से
उचक-उचक कर

बहुत गहरा है रिश्ता
सिमरू और ढोल का-
जैसे साँस और धड़कन का

ढोल ख़ामोश है
तो ख़ामोश है
अखाड़े की माटी

ख़ामोश ढोल को
जगाएँगे हाथ सिमरू के
ढोल बजेगा
जागेगा अखाड़ा
जागेगी माटी अखाड़े की
माटी ही तो है
जो स्वीकारती है सभी को
अच्छे हों या बुरे
हर रूप में!

  1. ढोल बजाता है सिमरू ही - पंक्ति में 'ही' क्या इंगित करता है?   1
    1. आदत
    2. महत्त्व
    3. आडंबर
    4. प्रेम
  2. कुश्ती में जोश कब भर आता है?   1
    1. जब हारता हुआ पहलवान जीतने लगता है।
    2. जब दोनों पहलवान बराबर की टक्कर वाले होते है।
    3. जब फ़ाइनल कुश्ती द्वारा राष्ट्रीय विजेता तय होता है।
    4. जब सिमरू द्वारा ढ़ोल बजाया जाता है।
  3. माटी द्वारा अच्छे-बुरे को स्वीकारने का क्या तात्पर्य है?   1
    1. माटी सबको जीतने का समान अवसर देती है।
    2. माटी का न्याय सबको स्वीकार्य होता है।
    3. अंत में अच्छे-बुरे सभी माटी में मिल जाते हैं।
    4. माटी की गोद में अच्छे-बुरे सभी पलते हैं।
  4. ढोल तथा अखाड़े की माटी में क्या समानता बताई गई है?   1
    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    कथन (I): दोनों को उपयोग करने से पहले तैयार करना होता है।
    कथन (II): दोनों में श्रम की आवश्यकता होती है।
    कथन (III): दोनों का प्रयोग कर लोग अपनी कला सिद्ध करते है।
    कथन (IV): दोनों की परिवर्तन में भूमिका होती है।
    निम्नलिखित विकल्पों पर विचार कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    विकल्प:
    1. केवल कथन (III) सही है।
    2. केवल कथन (IV) सही है।
    3. केवल कथन (II) और (III) सही हैं।
    4. केवल कथन (I) और (IV) सही हैं।
  5. कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।   1
      कॉलम 1   कॉलम 2
    1 सिमरू (i) श्रमजीवी वर्ग
    2 ढोल (ii) सामाजिक भूमि
    3 अखाड़ा (iii) परिश्रम

    1. 1 - (iii), 2 - (i), 3 - (ii)
    2. 1 - (i), 2 - (iii), 3 - (ii)
    3. 1 - (i), 2 - (ii), 3 - (iii)
    4. 1 - (ii), 2 - (i), 3 - (iii)
[6] अपठित विभाग
Chapter: [6] अपठित विभाग
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

व्यक्ति पर प्रशंसा का क्या प्रभाव पड़ता है? 'बात सीधी थी पर' कविता के आधार पर बताइए।

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

डॉ. आंबेडकर 'समता' को कल्पना की वस्तु क्यों मानते हैं?

[1.18] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
Chapter: [1.18] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
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बात (कथ्य) के लिए नीचे दी गई विशेषताओं का उचित बिंबों/मुहावरों से मिलान करें।

बिंब/मुहावरा विशेषता
 (क) बात की चूड़ी मर जाना  कथ्य और भाषा सही सामंजस्य बनना
 (ख) बात की पेंच खोलना  बात का पकड़ में न आना
 (ग) बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना  बात का प्रभावहीन हो जाना
 (घ) पेंच को कील की तरह ठोंक देना  बात में कसावट का न होना
 (ङ) बात का बन जाना  बात को सहज और स्पष्ट करना
[4] व्याकरण
Chapter: [4] व्याकरण
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बात से जुड़े कई मुहावरे प्रचलित हैं। कुछ मुहावरों का प्रयोग करते हुए लिखें।

[4] व्याकरण
Chapter: [4] व्याकरण
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नीचे दिए गए खबर के अंश को पढ़िए और बिहार के इस बुधिया से एक काल्पनिक साक्षात्कार कीजिए-
उम्र पाँच साल, संपूर्ण रूप से विकलांग और दौड़ गया पाँच किलोमीटर। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यह कारनामा कर दिखाया है पवन ने। बिहारी बुधिया के नाम से प्रसिद्ध पवन जन्म से ही विकलांग है। इसके दोनों हाथों का पुलवा नहीं है, जबकि पैर में सिर्फ़ एड़ी ही है। पवन ने रविवार को पटना के कारगिल चौक से सुबह 8.40 पर दौड़ना शुरू किया। डाकबैंगला रोड, तारामंडल और आर ब्लाक होते हुए पवन का सफर एक घंटे बाद शहीद स्मारक पर जाकर खत्म हुआ।
पवन द्वारा तय की गई इस दूरी के दौरान ‘उम्मीद स्कूल’ के तकरीबन तीन सौ बच्चे साथ दौड़कर उसका हौसला बढ़ा रहे थे। सड़क किनारे खड़े दर्शक यह देखकर हतप्रभ थे कि किस तरह एक विकलांग बच्चा जोश एवं उत्साह के साथ दौड़ता चला जा रहा है। जहानाबाद जिले का रहने वाला पवन नवरसना एकेडमी, बेउर में कक्षा एक का छात्र है। असल में पवन का सपना उड़ीसा के बुधिया जैसा करतब दिखाने का है। कुछ माह पूर्व बुधिया 65 किलोमीटर दौड़ चुका है। लेकिन बुधिया पूरी तरह से स्वस्थ है जबकि पवन पूरी तरह से विकलांग। पवन का सपना कश्मीर से कन्याकुमारी तक की दूरी पैदल तय करने का है।
9 अक्टूबर, 2006 हिंदुस्तान से साभार
[5] लेखन कौशल्य
Chapter: [5] लेखन कौशल्य
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भोर के दृश्य को देखकर अपने अनुभव काव्यात्मक शैली में लिखिए।

[1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
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जयशंकर प्रसाद की काव्य रचना 'आँसू' पढ़िए।

[1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
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जयशंकर प्रसाद की कविता 'हमारा प्यारा भारतवर्ष' तथा रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'हिमालय के प्रति' का कक्षा में वाचन कीजिए।

[1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
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निराला के जीवन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए रामविलास शर्मा की कविता 'महाकवि निराला' पढ़िए।

[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
Chapter: [1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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अपने बचपन की स्मृतियों को आधार बनाकर एक छोटी सी कविता लिखने का प्रयास कीजिए।

[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
Chapter: [1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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अज्ञेय की कविताएँ 'नदी के द्वीप' व 'हरी घास पर क्षणभर' पढ़िए और कक्षा की भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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'मानव और समाज' विषय पर परिचर्चा कीजिए।

[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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भारतीय दर्शन में 'सागर' और 'बूँद' का संदर्भ जानिए।

[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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आज़ादी के बाद बदलते परिवेश का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करने वाली कविताओं का संकलन कीजिए तथा एक विद्यालय पत्रिका तैयार कीजिए।

[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
Chapter: [1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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'महानता लाभलोभ से मुक्ति तथा समर्पण त्याग से हासिल होता है' को केंद्र में रखकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
Chapter: [1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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