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15 मीटर लंबे एवं 6.0 × 10−7 m2 अनुप्रस्थ काट वाले तार से उपेक्षणीय धारा प्रवाहित की गई है और इसका प्रतिरोध 5.0 Ω मापा गया है। प्रायोगिक ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता क्या होगी?
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मिश्रधातु मैंगनिन के बने प्रतिरोधक पर लिए गए निम्नलिखित प्रेक्षणों से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
| धारा | वोल्टता | धारा | वोल्टता |
| 0.2 | 3.94 | 3.0 | 59.2 |
| 0.4 | 7.87 | 4.0 | 78.8 |
| 0.6 | 11.8 | 5.0 | 98.6 |
| 0.8 | 15.7 | 6.0 | 118.5 |
| 1.0 | 19.7 | 7.0 | 138.2 |
| 2.0 | 39.4 | 8.0 | 158.0 |
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I धारावाही, N फेरों और R त्रिज्या वाली वृत्ताकार कुंडली के लिए, इसके अक्ष पर, केन्द्र से x दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए निम्नलिखित व्यंजक है-
B = `(mu_0 "IR"^2"N")/(2(x^2 + "R"^2)^(3//2))`
(a) स्पष्ट कीजिए, इससे कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए सुपरिचित परिणाम कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
(b) बराबर त्रिज्या R एवं फेरों की संख्या N, वाली दो वृत्ताकार कुंडलियाँ एक-दूसरे से R दूरी पर एक-दूसरे के समान्तर, अक्ष मिलाकर रखी गई हैं। दोनों में समान विद्युत धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है। दर्शाइए कि कुण्डलियों के अक्ष के लगभग मध्यबिन्दु पर क्षेत्र, एक बहुत छोटी दूरी के लिए जो कि Rसे कम है, एकसमान है और इस क्षेत्र का लगभग मान निम्नलिखित है-
B = `0.72 (mu_0 "NI")/"R"`
[बहुत छोटे से क्षेत्र पर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए बनायी गई ऊपर वर्णित व्यवस्था हेल्महोल्ट्ज कुण्डलियों के नाम से जानी जाती है।]
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धनात्मक z-दिशा में 3000 G की एक एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र लगाया गया है। एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ 10 cm एवं 5 cm और जिसमें 12 A धारा प्रवाहित हो रही है, इस क्षेत्र में रखा है। चित्र 4.7 में दिखायी गई लूप की विभिन्न स्थितियों में इस पर लगने वाला बल-युग्म आघूर्ण क्या है? हर स्थिति में बल क्या है? स्थायी सन्तुलन वाली स्थिति कौन-सी है?
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| (a) | (b) | (c) |
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| (d) | (e) | (f) |
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एक जगह से दूसरी जगह जाने पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र बदलता है। क्या यह समय के साथ भी बदलता है? यदि हाँ, तो कितने समय अन्तराल पर इसमें पर्याप्त परिवर्तन होते हैं?
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पृथ्वी के क्रोड में लोहा है, यह ज्ञात है। फिर भी भूगर्भशास्त्री इसको पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का स्रोत नहीं मानते। क्यों?
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अपने 4-5 अरब वर्षों के इतिहास में पृथ्वी अपने चुम्बकीय-क्षेत्र की दिशा कई बार उलट चुकी होगी। भूगर्भशास्त्री, इतने सुदूर अतीत के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के बारे में कैसे जान पाते हैं?
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बहुत अधिक दूरियों पर (30,000 km से अधिक) पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं?
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अन्तरातारकीय अन्तरिक्ष में 10-12 T की कोटि का बहुत ही क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र होता है। क्या इस क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र के भी कुछ प्रभावी परिणाम हो सकते हैं। समझाइए।
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एक छड़ चुंबक जिसका चुंबकीय-आघूर्ण 1.5 J T-1 है, 0.22 T के एक एकसमान चुंबकीय-क्षेत्र के अनुदिश रखा है।
- एक बाह्य बल आघूर्ण कितना कार्य करेगा यदि यह चुंबक को चुंबकीय-क्षेत्र के
- लंबवत
- विपरीत दिशा में संरेखित करने के लिए घुमा दे।
- स्थिति (i) एवं (ii) में चुंबक पर कितना बल आघूर्ण होता है।
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अनुचुम्बकत्व के विपरीत, प्रतिचुम्बकत्व पर ताप का प्रभाव लगभग नहीं होता। क्यों?
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क्या किसी लौह चुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकशीलता चुम्बकीय-क्षेत्र पर निर्भर करती है? यदि हाँ, तो उच्च चुम्बकीय-क्षेत्रों के लिए इसका मान कम होगा या अधिक?
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नर्म लोहे के एक टुकड़े के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल, कार्बन-स्टील के टुकड़े के शैथिल्य लूप के क्षेत्रफल से कम होता है। यदि पदार्थ को बार-बार चुम्बकन चक्र से गुजारा जाए तो कौन-सा टुकड़ा अधिक ऊष्मा ऊर्जा का क्षय करेगा?
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एक लम्बे, सीधे, क्षैतिज केबल में 2.5 A धारा, 10° दक्षिण-पश्चिम से 10° उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर भौगोलिक याम्योत्तर के 10° पश्चिम में है। यहाँ पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र 0.33 G एवं नति कोण शून्य है। उदासीन बिन्दुओं की रेखा निर्धारित कीजिए। (केबल की मोटाई की उपेक्षा कर सकते हैं।) (उदासीन बिन्दुओं पर, धारावाही केबल द्वारा चुम्बकीय-क्षेत्र, पृथ्वी के क्षैतिज घटक के चुम्बकीय-क्षेत्र के समान एवं विपरीत दिशा में होता है।)
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3.0 cm ऊँची कोई बिंब 21 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस के सामने 14 cm दूरी पर रखी है। लेंस द्वारा निर्मित प्रतिबिंब का वर्णन कीजिए। क्या होता है जब बिंब लेंस से दूर हटती जाती है?
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56V विभवान्तर के द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉनों का
- संवेग, और
- दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए।
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एक इलेक्ट्रॉन जिसकी गतिज ऊर्जा 120 eV है, उसका (a) संवेग, (b) चाल, और (c) दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य क्या है?
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एक 0.040 kg द्रव्यमान का बुलेट जो 1.0 km/s की चाल से चल रहा है, का दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य कितना होगा?
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एक 0.060 kg द्रव्यमान की गेंद जो 1.0 m/s की चाल से चल रही है, का दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य कितना होगा?
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एक धूल-कण जिसका द्रव्यमान 1.0 × 10−9 kg और जो 2.2 m/s की चाल से अनुगमित हो रहा है, का दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य कितना होगा?
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