‘गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है’ - इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
Chapter: [16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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पुजारी ने लड़की के ‘हम’ को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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उस छोटी-सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी, इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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“पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।” कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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‘मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।’
कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन दीजिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।’
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।’
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धरिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।’
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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‘हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।’
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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इस पाठ का शिल्प आख्याता (नैरेटर-लेखक) की ओर से लिखते हुए बना है - पाठ से कुछ उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।
[16] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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‘नाम’ क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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‘कुट’, ‘कुटज’ और ‘कुटनी’ शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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‘कुटज’ हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज क्या केवल जी रहा है - लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमज़ोरियों पर टिप्पणी की है?
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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लेखक क्यों मानता है कि स्वार्थ से भी बढ़कर जिजीविषा से भी प्रचंड कोई न कोई शक्ति अवश्य है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
[17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [17] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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