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Arts (English Medium) इयत्ता १२ - CBSE Question Bank Solutions for Hindi (Core)

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Hindi (Core)
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।

[1.14] फणीश्वर नाथ रेणु : पहलवान की ढोलक
Chapter: [1.14] फणीश्वर नाथ रेणु : पहलवान की ढोलक
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

जिन्हें अपनी ज़रूरत का पता नहीं होता, वे लोग बाज़ार का बाज़ारूपन कैसे बढ़ाते हैं?

[1.12] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [1.12] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

उस घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए जिससे पता चलता है कि लेखक की माँ उसके मन की पीड़ा समझ रही थी? 'जूझ' कहानी के आधार पर बताइए।

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

अजायबघर में रखे सिंधु-सभ्यता के पुरातत्व के अवशेषों से किसका महत्व सिद्ध होता है - कला का या ताकत का? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
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कविता और बच्चे को समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं?

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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'भाषा को सहूलियत' से बरतने से क्या अभिप्राय है?

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ‘सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है’ कैसे?

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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व्याख्या करें

ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी।

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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आधुनिक युग में कविता की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए?

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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चूड़ी, कील, पेंच आदि मूर्त्त उपमानों के माध्यम से कवि ने कथ्य की अमूर्त्तता को साकार किया है। भाषा को समृद्ध एवं संप्रेषणीय बनाने में, बिबों और उपमानों के महत्त्व पर परिसंवाद आयोजित करें।

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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सुंदर है सुमन, विहग सुंदर
मानव तुम सबसे सुंदरतम।

पंत की इस कविता में प्रकृति की तुलना में मनुष्य को अधिक सुंदर और समर्थ बताया गया है 'कविता के बहाने' कविता में से इस आशय को अभिव्यक्त करने वाले बिंदुओं की तलाश करें।
[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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प्रतापनारायण मिश्र का निबंध 'बात' और नागार्जुन की कविता 'बातें' ढूँढ़ कर पढ़ें।

[1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
Chapter: [1.03] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का मेघ ही कर सकता है- तुलसी का यह काव्य-सत्य क्या इस समय का भी युग-सत्य है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

मम हित लागि जतेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पितु बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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भ्रातृशोक में हुई राम की दशा को कवि ने प्रभु की नर लीला की अपेक्षा सच्ची मानवीय अनुभूति के रूप में रचा है। क्या आप इससे सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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शोकग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को करुण रस के बीच वीर रस का आविर्भाव क्यों कहा गया है?
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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कालिदास के रघुवंश महाकाव्य में पत्नी (इंदुमती) के मृत्यु-शोक पर अज तथा निराला की सरोज-स्मृति में पुत्री (सरोज) के मृत्यु-शोक पर पिता के करुण उद्गार निकले हैं। उनसे भ्रातृशोक में डूबे राम के इस विलाप की तुलना करें।

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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राम कौशल्या के पुत्र थे लक्ष्मण सुमित्रा के। इस प्रकार वे परस्पर सहोदर (एक ही माँ के पेट से जन्मे) नहीं थे। फिर, राम ने उन्हें लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा- ''मिलइ न जगत सहोदर भ्राता''? इस पर विचार करें।
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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