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Hindi Medium इयत्ता १० - CBSE Important Questions

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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- 

परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है।
  1. परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
    (क) सत्य सिद्ध होना
    (ख) कथन का प्रामाणिक होना
    (ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
    (घ) योग्यता का मूल्यांकन होना

  2. 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
    (क) तैराकी
    (ख) परिश्रम
    (ग) परीक्षण
    (घ) हस्तशिल्प

  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    1. परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
    2. आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
    3. पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
      उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?

      (क) केवल (i)
      (ख) केवल (ii)
      (ग) (i) और (iii)
      (घ) (ii) और (iii)
  4. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
    (क) परीक्षण
    (ख) योजनाएँ
    (ग) अन्वेषण
    (घ) सिंहमुपैति
  5. निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
    (क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
    (ख) गया समय वापस नहीं आता है।
    (ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
    (घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

    आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों - बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती।

    भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों।

  1. आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि -
    (A) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
    (B) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
    (C) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
    (D) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती।
  2. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A): जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
    कारण (R): भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
    (A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (B) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
    (C) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
  3. गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है -
    (A) साहित्य समाज का दर्पण है।
    (B) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
    (C) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
    (D) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है।
  4. 'दर्द और मुसकान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती।' लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है -
    (A) यथार्थ की समझ
    (B) सामाजिक समरसता
    (C) साहित्य-प्रेम
    (D) भाषा कौशल
  5. भाषा तब सही आकार पाती है, जब -
    (A) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
    (B) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
    (C) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
    (D) भाषायी कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

    साहित्य को समाज का प्रतिबिंब माना गया है अर्थात समाज का पूर्णरूप साहित्य में प्रतिबिंबित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक ओर तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौन-सा मार्ग उपादेय है? एक आलोचक के शब्दों में - "कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।”

     साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। जिस सामाजिक वातावरण में उसका जन्म होता है, उसी में उसका शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक विकास भी होता है। अत: यह कहना सर्वथा असंभव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णतः निरपेक्ष या तटस्थ रह कर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेंदु , प्रेमचंद आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ठ रूप से संबंध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।

  1. साहित्य समाज का प्रतिबिंब है क्योंकि यह -
    (A) समाज की वास्तविकता का द्योतक है।
    (B) समाज में लोक व्यवहार का समर्थक है।
    (C) व्यक्ति की समस्याओं का निदान करता है।
    (D) साहित्य को दिशा प्रदान करता है।
  2. गद्यांश दर्शाता है -
    (A) समाज एवं साहित्य का पारस्परिक संबंध
    (B) समाज एवं साहित्य की अवहेलना
    (C) साहित्यकार की सृजन शक्ति
    (D) सामाजिक शिष्टाचार एवं लोक व्यवहार
  3. साहित्य की क्षणभंगुरता का कारण होगा -
    (A) सामाजिक अवज्ञा
    (B) सामाजिक समस्या
    (C) सामाजिक सद्भाव
    (D) सामाजिक समरसता
  4. वाल्मीकि, तुलसी, सूर के उदाहरण द्वारा लेखक चाहता है -
    (A) भाव साम्यता
    (B) प्रत्यक्ष प्रमाण
    (C) सहानुभूति
    (D) शिष्टाचार
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A) - कवि अपने काव्य के उपकरणों का प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।
    कारण (R) - कवि हृदय अत्यधिक संवेदनशील होता है एवं सदैव देशहित चाहता है।
    (A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (B) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
    (C) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

रेखाङ्कित-पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-

प्रकृत्याः सन्निधौ वास्तविक सुखं विद्यते।

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Chapter: [1] शुचिपर्यावरणम्
Concept: शुचिपर्यावरणम्

अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतेन लिखत:

'संस्कृतभाषा सर्वभाषाणां जननी' इत्युच्यते। परम्‌ अद्यत्वे छात्राणां मध्ये एक: चर्चित: प्रश्न: वर्तते यत्‌ "संसकृतपठनेन के लाभा:?" अर्थात्‌ संस्कृतपठनेन जीवनवृत्तेः अवसराः कै? वस्तुतः भौतिके युगे ईदृशी जिज्ञासा स्वाभाविकी एव। अस्या: जिज्ञासायाः समुचितं समाधानं सञ्चारमाध्यमेन कर्तुं शक्यते। वयम्‌ पश्याम: यत्‌ अद्यत्वे संस्कृतपटनेन नैके लाभा: सन्ति। संस्कृतभाषा विश्वस्य प्राचीनतमासु भाषासु अन्यतमा अस्ति। ऐतिहासिकदृष्ट्या संस्कृते लिखिता: ग्रन्था: वेदा: महत्त्वपूर्ण स्थानं भजन्ते। आधुनिकसंस्कृतस्य वैज्ञानिकभाषारूपेण सर्वत्र महत्त्वपूर्णं स्थानं दृश्यते। यदा विश्वं कृत्रिममेधा विषये अनुसन्धानं करोति तत्र संस्कृतं महत्‌ साहाय्यं कर्तुं शक्नोति। यतो हि संस्कृतस्य व्याकरणं पूर्णतया वैज्ञानिकम् अस्ति। वर्तमान समये संस्कृतस्य अध्येतारः शिक्षणकौशल-चिकित्सा-खगोल-विद्या-वास्तुविद्या- 'आई.ए.एस.' प्रभृति। सर्वेषु क्षेत्रेषु स्वप्रतिभाप्रदर्शनं कुर्वन्ति। अस्मांक संस्कृति: संस्कृताधारिता अपि। अत एव संस्कृतभाषाया: अध्ययनं जीवनमूल्यपरकम्‌ जीवनवृत्तिसाधनपरम्‌ च अस्ति, नात्र कोऽपि सन्देह:।

(अ) एकपदेन उत्तरतः (केवलं प्रश्नद्वयम्‌)            2

  1. सर्वभाषाणां जननी का?
  2. अस्माकं संकृतिः का आधारित वर्तते?
  3. कस्य व्याकरणं वैज्ञानिकम्?

(आ) पूर्णवाक्येन उत्तरत: (केवलं प्रश्नद्वयम्‌)        4

  1. ऐतिहासिकदृष्ट्या के महत्वपूर्णं स्थानं भजन्ते? 
  2. वर्तमानसमये शिक्षणकौशलादिषु सर्वेषु क्षेत्रेषु के स्वप्रतिभा-प्रदर्शनं कुर्वन्ति?
  3. संस्कृतभाषाया: अध्ययनं कीदृशम्‌ अस्ति?

(इ) अस्य अनुच्छेदस्य कृते उपयुक्तं शीर्षकं संस्कृतेन लिखत।         1

(ई) यथानिर्देशम्‌ उत्तरतः (केवलं प्रश्नत्रयम्‌)         3

(i) 'पश्याम:' इति क्रिया पदस्य कर्तृपंद किम्‌?

(A) नैके
(B) वयम्‌
(C) लाभाः
(D) संस्कृतपठनेन

(ii) 'समुचितम्‌' इति विशेषणपदस्य विशेष्यपदं किम्‌?

(A) समाधानम्‌
(B) संस्कृतशिक्षक:
(C) स्वानुभवैः
(D) जिज्ञासाया:

(iii) 'हानयः' इति पदस्य किं विपर्ययपदं गद्यांशे प्रयुक्तम्?

(A) सन्ति
(B) लिखिताः
(C) लाभाः
(D) नैके

(iv) 'अध्येतार:' इति कर्तृपदस्यं क्रियापदं कि प्रयुक्तम्?

(A) अस्ति
(B) सन्ति
(C) भजन्ते
(D) कुर्वन्ति

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Chapter: [1] अपठितावबोधनम्
Concept: अपठितावबोधनम्

अधोलिखित-रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

हरिततरूणां माला रमणीया।

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Chapter: [1] शुचिपर्यावरणम्
Concept: शुचिपर्यावरणम्

मञ्जूषाया: सहायतया अधोलिखितश्लोकस्य अन्वयं पूरयित्वा पुन: लिखत।

प्रस्तरतले लतातरुगुल्मा नो भवन्तु पिष्टा:।
पाषाणी सभ्यता निसर्गे स्यान्न समाविष्टा।।
मानवाय जीवनं कामये नो जीवन्मरणम्‌। शुचि।।

अन्वय:-

(i) ______ प्रस्तरतले पिष्टाः नो (ii) ______। निसर्गे (iii) ______ सभ्यता समाविष्टा न (iv) ______। मानवाय जीवनं कामये नो जीवन्मरणम्‌।

मञ्जूषा 

पाषाणी, स्यात्‌, लतातरुगुल्मा:, भवन्तु
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Chapter: [1] शुचिपर्यावरणम्
Concept: शुचिपर्यावरणम्

स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-

त्वं मानुषात् बिभेषि।

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Chapter: [2] बुद्धिर्बलवती सदा
Concept: बुद्धिर्बलवती सदा

निम्नलिखितं विषयमधिकृत्य मञ्जूषाप्रदत्तशब्दानां साहाय्येन न्यूनातिन्यूनं पञ्चभि: संस्कृतवाक्यै: एकम्‌ अनुच्छेदं लिखत।

'मम प्रियं पुस्तकम्‌'

मञ्जूषा - मम, पठेन, महती, ज्ञानस्य, साधनम्‌, भगवद्गीता, पुस्तकम्‌, प्रियम्‌, रुचिः, गीतायाम्‌, भण्डार:, कर्मयोगः, भक्तियोगः, अर्जुनम्‌ प्रति, उपदेश:।
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Chapter: [3] अनुच्छेदलेखनम्
Concept: अनुच्छेदलेखनम्

प्रदत्तं चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषायां प्रदत्तशब्दानां सहायतया पञ्च वाक्यानि संस्कृतेन लिखत।

मञ्जूषा - सुन्दराणि, अनेकानि, चित्राणि, ऐतिहासिकस्थानानि, भवनानि, नौका, नद्याम्‌, ताजमहलम्‌, पर्वता:, सन्ति, मन्दिरम्‌, रक्तदुर्गम्‌।
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Chapter: [4] चित्रवर्णनम्
Concept: चित्रवर्णनम्

अधोलिखितं नाट्यांश पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानाम्‌ उत्तराणि संस्कृतेन लिखत।

रामः

अहो! उदात्तरम्यः समुदाचारः। किं नामधेयो भवतोर्गुरुः?

लवः

ननु भगवान्‌ वाल्मीकिः।

रामः

केन सम्बन्धेन?

लवः

उपनयनोपदेशेन।

रामः

अहमत्रभवतो: जनकं नामतो वेदितुमिच्छामि।

लवः

न हि जानाम्यस्य नामधेयम्‌। न कश्चिदस्मिन् तपोवने तस्य नाम व्यवहरति।

रामः

अहो माहात्म्यम्‌।

कुशः

जानाम्यहं तस्य नामधेयम्‌।

रामः

कथ्यताम्‌।

कुशः

निरनुक्रोशो नाम।

रामः

वयस्य, अपूर्वं खलु नामधेयम्‌।

विदूषकः

(विचिन्त्य) एवं तावत्‌ पृच्छामि। निरनुक्रोश इति क एवं भणति?

कुशः

अम्बा।

(i) एकपदेन उत्तरत। (केवलं प्रश्नद्वयम्)      1

(क) लवस्य गुरोः नाम किम्‌?

(ख) लवकुशयो: गुरो: नाम कः पृच्छति?

(ग) लवस्य पितु: नाम क: जानाति?

(ii) पूर्णवाक्येन उत्तरत। (केवलं प्रश्नद्वयम्)     2

(क) वाल्मीकि: केन सम्बन्धेन लवकुशयो: गुरु: अस्ति?

(ख) कुशः स्वपितु: नाम किम्‌ ज्ञापयति?

(ग) क: लवकुशयो: जनकस्य नाम वेदितुम्‌ इच्छति?

(iii) निर्देशानुसारम्‌ उत्तरत। (केवलं प्रश्नद्वयम्)      2

(क) 'वाल्मीकि:' इति पदस्य विशेषणपदं किम्‌?

(ख) 'जानामि' इति पदस्य कर्तृपदं किम्‌?

(ग) 'माता' इति पदस्य पर्यायपदं किं प्रयुक्तम्‌?

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Chapter: [4] शिशुलालनम्
Concept: शिशुलालनम्

रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

अयम्‌ अन्येभ्यो दुर्बलः।

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Chapter: [5] जननी तुल्यवत्सला
Concept: जननी तुल्यवत्सला

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

मधुर मेरा मित्र है।

Madhur is my friend.

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Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

अनेक लोग उद्यान में घूम रहे हैं।

Many people are walking in the park.

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Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

हम सब घर जा रहे हैं।

We all are going home.

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Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

रमा ने कल संस्कृत गीत गाया।

Rama sang a Sanskrit song yesterday.

Appears in 1 question paper
Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

विद्यालय में सौ शिक्षक हैं।

There are hundred teachers in the school.

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Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

कल दस बजे परीक्षा होगी।

The examination will be held tomorrow at 10 o’clock.

Appears in 1 question paper
Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित वाक्यं संस्कृतभाषया अनूद्य लिखत।

मैं हिन्दी भाषा जानता हूँ।

I know Hindi language.

Appears in 1 question paper
Chapter: [5] रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)
Concept: रचनानुवाद: (वाक्‍यरचनाकौशलम्)

अधोलिखित-रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत।

सुरभिः पुत्रस्य दैन्यं दृष्ट्वा रोदिति।

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Chapter: [5] जननी तुल्यवत्सला
Concept: जननी तुल्यवत्सला
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