मराठी

यों तो इस झंझट से छुटकारा पाने का सरल उपाय यही है कि तुम्हें बाग वाला मकान दे दिया जाए. - वह पड़ा भी बेकार है और अभी मैं उससे किसी तरह का भी काम लेने का इरादा नहीं रखता, - Hindi

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प्रश्न

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:-

यों तो इस झंझट से छुटकारा पाने का सरल उपाय यही है कि तुम्हें बाग वाला मकान दे दिया जाए. - वह पड़ा भी बेकार है और अभी मैं उससे किसी तरह का भी काम लेने का इरादा नहीं रखता, पर तुम तो जानते हो बेटा, मेरे जीते जी यह असंभव है।

सखी डाली - उपेन्दनाथ ‘अश्क’
Sukhi dali - Upendra Nath ‘Ashka’

  1. प्रस्तुत कथन के वक्ता और श्रोता कौन है? [2]
  2. श्रोता को बागवाला मकान क्यों चाहिए और इसके लिए उसने क्या तर्क दिया? [2]
  3. वक्ता ने इस समस्या के हल के लिए क्या किया? क्या वे समस्या के समाधान में सफल हुए? [3]
  4. ‘परिवार का एक सिरा किसी समझदार व्यक्ति के हाथ में होने से परिवार में एकता बनी रहती है।’ क्या आप इस कथन से सहमत है? एकांकी के सदर्भ में तरकपूर्ण उत्तर दीजिए। [3]
आकलन
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उत्तर

  1. प्रस्तुत कथन के वक्ता दादा मूलराज हैं और इसके श्रोता उनके पोते परेश हैं।
  2. श्रोता (परेश) को बागवाला मकान इसलिए चाहिए ताकि वह अपनी पत्नी बेला के साथ वहाँ अलग (स्वतंत्र) रह सके, क्योंकि बेला को संयुक्त परिवार के माहौल में तालमेल बिठाने में कठिनाई हो रही थी। इसके लिए उसने यह तर्क दिया कि वह मकान बेकार पड़ा है और वहाँ अलग रहकर वे आपसी झगड़ों और मनमुटाव से बच सकेंगे।
  3. दादा मूलराज ने परिवार के सभी सदस्यों (बहुओं और बच्चों) को बुलाकर सख्त निर्देश दिए कि वे बेला का पूरा सम्मान करें, उसकी हर बात मानें और उसे घर की ‘महारानी’ की तरह रखें। उन्होंने परिवार को बिखरने से बचाने के लिए अपनी सत्ता का प्रयोग किया। हाँ, वे तात्कालिक रूप से परिवार को टूटने से बचाने में सफल हुए। बेला का मन बदल गया और वह परिवार के साथ रहने को तैयार हो गई, क्योंकि उसे अहसास हुआ कि परिवार से अलग होकर वह ‘सूखी डाली’ की तरह हो जाएगी।
  4. हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। ‘सूखी डाली’ एकांकी में दादा मूलराज उस ‘वटवृक्ष’ के समान हैं जो पूरे परिवार को अपनी छत्रछाया में रखते हैं। जब बेला के आने से परिवार में अलगाव की स्थिति पैदा हुई, तब दादा जी ने क्रोध के बजाय धैर्य और सूझबूझ से काम लिया। वे जानते थे कि यदि परिवार का एक भी सदस्य (डाली) अलग होता है, तो वह सूख जाता है और परिवार की शक्ति कम हो जाती है। उनकी दूरदर्शिता के कारण ही परिवार की एकता खंडित होने से बच गई। इससे सिद्ध होता है कि एक समझदार मुखिया ही परिवार को मुश्किल समय में बिखरने से बचा सकता है।
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