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प्रश्न
विद्युत चलित्र की स्वच्छ नामांकित आकृति बनाकर उसका सिद्धांत लिखिए।
आकृती
दीर्घउत्तर
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उत्तर

विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा मे रूपांतरण करने वाले यंत्र को विद्युत चलित्र कहते है। इस बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम द्वारा निर्धारित की जाती है। जब कुंडली (ABCD) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसकी दोनों भुजाओं (AB और CD) पर विपरीत दिशा में बल लगता है। यह बल कुंडली को धुरी पर घुमाने का प्रयास करता है। विभक्त वलय (Split rings) हर आधे चक्कर के बाद धारा की दिशा बदल देते हैं, जिससे कुंडली एक ही दिशा में निरंतर घूमती रहती है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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