मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (मराठी माध्यम) इयत्ता ९ वी

उपयुक्त प्रश्नचार्ट: कब, समय/ काल

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प्रश्न

उपयुक्त प्रश्नचार्ट:

तक्ता
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उत्तर

कब समय/ काल

उदाहरण: इस कार्यक्रम का समापन कब होगा?

shaalaa.com
गद्‍य आकलन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.9: रचना विभाग एवं व्याकरण विभाग - उपयुक्त प्रश्नचार्ट [पृष्ठ ५३]

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बालभारती Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 2.9 रचना विभाग एवं व्याकरण विभाग
उपयुक्त प्रश्नचार्ट | Q २ | पृष्ठ ५३

संबंधित प्रश्‍न

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों :

विख्यात गणितज्ञ सी.वी. रमण ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सकि्‍का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा 
लिया था।           
      रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था । उसे कुछ कठनिाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेह हुए । वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके । रमण को पता चला तो उन्होंने उस समस्‍या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसद्धि लॉर्डरेले के नबिंध पढ़े और उस समस्‍या का एक नया ही हल खोज नकिाला । यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लाॅर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमण की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की । अध्यापक जोन्स भी प्रसन्न हुए और उन्होंने रमण से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा । रमण ने लेख लिखकर श्री जोन्स को दिया, पर जोन्स उसे जल्‍दी लौटा न सके । कारण संभवतः यह था कि वह उसे पूरी तरह आत्‍मसात न कर सके ।

प्रश्न :

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______
  5. ______

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

'तविषा अपराध-बोध से भरी हुई थी। मांडवी दी से उसने अपना संशय बाँटा। चावल की टंकी में घुन हो रहे थे। उस सुबह उसने मारने के लिए डाबर की पारे की गोलियों की शीशी खोली थी चावलों में डालने के लिए । शीशी का ढक्कन मरोड़कर जैसे ही उसने ढक्कन खोलना चाहा, कुछ गोलियाँ छिटककर दूर जा गिरीं । गोलियाँ बटोर उसने टंकी में डाल दीथीं। फिर भी उसे शक है कि एकाध गोली ओने-कोने में छूट गई होगी।


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हो।

दक्षिण और पश्चिमी भारत में स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा समाज सेवा की एक पुरानी परंपरा है। सादा जीवन, उच्च विचार और कठिन परिश्रम। इस परंपरा में अनेक स्वैच्छिक संस्थाएँ विकसित हुई हैं। उनमें से कुछ संस्थाएँ पर्यावरण की सुरक्षा में भी काम कर रही हैं। इन संस्थाओं को काफी पढ़े-लिखे लोगों, वैज्ञानिकों और शिक्षकों का सामयिक सहयोग मिलता रहता है। अभाग्यवश अनेक स्वैच्छिक संस्थाएँ दलगत राजनीति में अधिक विश्वास करती हैं और उनके आधार पर सरकारी सहायता लेने का प्रयास करती हैं। पर्वतीय क्षेत्र में सादगी की अभी यही व्यवस्था चलती है और इसलिए 'चिपको' आंदोलन बहुत हद तक सफल हुआ है। 'गाँधी शांति प्रतिष्ठान' तथा कुछ गांधीवादी संगठनों ने भी इस दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया है। सरला बहन ने अल्मोड़ा में इस काम की शुरूआत तब की थी जबकि पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता नहीं थी। श्री. प्रेमभाई और डॉ. रागिनी प्रेम ने मिर्जापुर में पर्यावरण पर प्रशंसनीय काम किया है।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों :

एक बार भगवान बुदूध का एक प्रचारक घूम रहा था। उसे एक भिखारी मिला। वह प्रचारक उसे धर्म का उपदेश देने लगा। उस भिखारी ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। उसमें उसका मन ही नहीं लगता था। प्रचारक नाराज हुआ। बुदूध के पास जाकर बोला, "वहाँ एक भिखारी बैठा है, मैं उसे इतने अच्छे-अच्छे सिखावन दे रहा था, तो भी वह सुनतां ही नहीं।" बुदूध ने कहा, "उसे मेरे पास लाओ।" यह प्रचारक उसे बुदूध के पास ले गया। भगवान बुद्ध ने उसकी दशा देखीं। उन्होंने ताड़ लिया कि भिखारी तीन-चार दिनों से भूखा है। उन्होंने उसे पेट भरकर खिलाया और कहा, “अब जाओ।'' प्रचारक ने कहा, "आपने उसे खिला तो दिया, लेकिन उपदेश कुछ भी नहीं दिया।" भगवान बुदूध ने कहा, "आज उसके लिए अन्न हीं उपदेश था। आज उसे अन्न की सबसे ज्यादा जरूरत थी। वह उसे पहले देना चाहिए। अगर वह जिएगा तो कल सुनेगा।"

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिसके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

कॉलेज के दिनों में एक बुरी लत लग गई, जो आज तक पीछा नहीं छोड़ रही है। कई बार पत्नी से बहस हो जाती है, मेरे से ज्यादा प्यारा अखबार है, जिसके साथ जब देखो, चिपके रहते हो। कया किया जाए; अखबार पढ़ने का नशा ही कुछ ऐसा है कि सुबह नहीं मिले तो लगता है कि दिन ही नहीं निकला। पढ़ी-लिखी पत्नी अखबार का महत्त्व समझती है। कभी-कभी तकरार जरूर होती है, परन्तु तकरार ही प्रेम की जननी हैं।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिसके उत्तर पद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

एक दिन राजा अचानक बीमार पड़ गए और उनकी तबीयत खराब होने लगी। महामंत्री ने वैद्य जी को दिखाया तो वैद्य जी कहने लगे कि राजा को अगर मैं सच बता दूँ तो वह मुझे सजा दे देगा। मंत्री ने पूछा “क्या बात है?” तब वैद्य ने कहा कि राजा शारीरिक रूप से काम नहीं करता है इसलिए बीमार रहता है। मंत्री ने राजा को इस बात की जानकारी दी। राजा अब किसान के रूप में काम करने लगा। थोड़े ही दिनों में वह स्वस्थ और प्रसन्न रहने लगा। उसने मंत्री को इस खुशी में इनाम दिया।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों -

सफलता या असफलता जीवन के दो पहलू हैं। व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसी के अनुसार उसे फल मिलता है। मेहनतकश इंसान जीवन कों सफल बना सकता है। आलसी व्यक्ति इस पृथ्वी पर एक बोझ की तरह होता है। अत: 'व्यंक्ति को सदा कर्म पर ही ध्यान देना चाहिए। अच्छे कर्म से व्यक्ति को परम आनन्द की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति परोपकारी होते हैं। समाज में परोधकारी व्यक्ति को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हो।

बसंत के आगमन के साथ ही कभी-कभी ऐसा लगता है, मानो जंगल में लाल रंग की लपटें उठ रही हों, ये लपटें आग की नहीं बल्कि पलाश के नारंगीपन लिए लाल फूलों की होती हैं। पलाश के लाल-लाल फूल आग की लपटों के समान ही दिखाई देते हैं। इसलिए इसे ‘फ्लेम ऑफ द फायर’ कहा जाता है।

पलाश भारतीय मूल का एक प्राचीन वृक्ष हैं। इसे आदिदेव ब्रह्मा और चंद्रदेव से संबंधित अलौकिक वृक्ष माना जाता है। इसमें एक ही स्थान पर तीन पत्ते होते हैं। इस पर कहावत प्रचलित है- ‘ढाक के तीन पात’। इसकी लकड़ी का हवन में उपयोग किया जाता है। इसीलिए इसे याज्ञिक भी कहते हैं। यज्ञ में काम आने वाले पात्र भी पलाश की लकड़ी से बनाए जाते हैं।


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों -

पिता जी ने धोती ऊपर कर ली, कुरते की बाँहें चढ़ा लीं और अपना पहाड़ी मोंटा डंडा दाहिने हाथ से कंधे पर सँभाले, बायाँ हाथ तेजी से हिलाते, नंगे पाँव आगे बढ़े।उन्होंने उनके पास जाकर कहा, “मैं लड़ने नहीं आया हूँ। लड़ने को आता तो अपने साथ औरों को भी लाता। डंडा केवल आत्मरक्षा के लिए साथ है, कोई अकेला मुझे चुनौती देगा तो पीछे नहीं हटूँगा। मर्द की लड़ाई बराबर की लड़ाई है, चार ने मिलकर एक को पीट दिया तो क्या बहादुरी दिखाई।”

निम्‍नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर गद्यांश में एक-एक वाक्‍य में हों:

           विख्यात गणितज्ञ सी. वी. रमन ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा 
लिया था।
           रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था। उसे कुछ कठनिाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेह हुए। वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके। रमन को पता चला तो उन्होंने उस समस्‍या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसिद्ध लॉर्ड रेले के निबंध पढ़े और उस समस्‍या का एक नया ही हल खोज निकाला। यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लाॅर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमन की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अध्यापक जोन्स भी प्रसन्न हुए और उन्होंने रमन से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा।

निम्‍नलिखित गद्यांश पर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हो।

मेरा विश्वास है कि नेता गढ़े नहीं जाते। वे जन्म लेते हैं। नेता का असली लक्षण है कि वे भिन्न मतावलंबियों को आम संवेदना के जरिए इकट्ठा कर सकते हैं। यह काम स्‍वाभाविक क्षमतावश अपने आप संपन्न हो जाता है, कोशिश करके यह संभव नहीं है। पश्चिमी देश से प्रत्‍यावर्तन से कुछ पहले एक अंग्रेज मित्र ने मुझसे सवाल किया था, ‘‘स्‍वामी जी, चार वर्ष विलास की लीलाभूमि, गौरव के मुकुटधारी, महाशक्‍तिशाली पाश्चात्‍य भूमि पर भ्रमण के बाद मातृभूमि आपको कैसी लगेगी?’’
मैंने उत्‍तर दिया, ‘‘पाश्चात्‍य भूमि में आने से पहले मैं भारत से प्यार करता था। अब भारत भूमि का धूल कण तक मेरे लिए पवित्र है। भारत की वायु मेरे लिए पवित्रतायुक्‍त है। मेरे लिए वह देश अब तीर्थ-स्‍वरूप है।’’ इसके अलावा मेरे मन को अन्य कोई उत्‍तर नहीं सूझा।

आपके आसपास के किसी फौजी से मुलाकात के लिए प्रश्नावली तैयार कीजिए।


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

महात्मा गाँधी ने पुस्तकों को व्यक्ति का सच्चा मित्र कहा है। पुस्तकों से अधिक आनंद और कहीं, किसी वस्तु में नहीं है। पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं। पुस्तकों में समाज पर प्रभाव डालने की अद्भुत क्षमता होती है। पुस्तक में ऐसी शक्ति होती है कि वह सोए देश में जागृति मंत्र फूँक दे, कमजोर मानव को बल दे, राजनेताओं पर अंकुश रखे। रूसो की पुस्तक फ्रांस में क्रांति का कारण बनी। लेनिन की पुस्तक रूस में मार्गदर्शक बनी तो गाँधी के विचार भारत को स्वतंत्र करा गए। इस प्रकार हम देखते हैं कि पुस्तकें पलभर में बादशाहत को पलटने की क्षमता रखती हैं। पुस्तकें लेखकों को अमर बना देती हैं। हम आज भी सूर, तुलसी, वाल्मीकि का नाम बहुत श्रद्धा से लेते हैं। पुस्तकें अकेलेपन की साथी भी हैं; क्योंकि ये अकेलेपन को भुलाए रहती हैं।

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