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‘उदारीकरण’ से क्या तात्पर्य है? - Sociology (समाजशास्त्र)

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प्रश्न

‘उदारीकरण’ से क्या तात्पर्य है?

दीर्घउत्तर
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उत्तर

 उदारीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जहाँ आर्थिक गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण को कम कर दिया जाता है तथा बाजार की शक्तियों को इसका निर्धारण करने के लिए छोड़ दिया जाता है। सामान्य अर्थों में यह एक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत सरकारी नियमों तथा कानूनों को पूँजी, श्रम तथा व्यापार में शिथिल कर देना, सरकारी उपक्रमों का निजीकरण (सार्वजनिक कंपनियों के निजी कंपनियों के हाथों बेच देना), आयात शुल्क में कमी करना, ताकि विदेशी वस्तुएँ सुगमतापूर्वक आयात की जा सके, शामिल होती हैं।

  • इसमें सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण शामिल होता है।
  • इससे विदेशी कंपनियों को भारत आने में सुविधा होती है।
  • इसे बाजारीकरण अर्थात् बाजार आधारित प्रक्रिया की सहायता से आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक समस्याओं का समाधान भी कहा जाता है।
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भूमंडलीकरण - स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को गठजोड़
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पाठ 4: बाज़ार एक सामाजिक संस्था के रूप में - प्रश्नावली [पृष्ठ ८२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sociology [Hindi] Class 12
पाठ 4 बाज़ार एक सामाजिक संस्था के रूप में
प्रश्नावली | Q 9. | पृष्ठ ८२
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