मराठी

सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्- युष्मत्कुटुम्बरक्षायै ………………. जानीहि व्रजाधुना। - Sanskrit (Core)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्-

 युष्मत्कुटुम्बरक्षायै ………………. जानीहि व्रजाधुना।

दीर्घउत्तर
Advertisements

उत्तर

प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती – प्रथमो भागः’ के अध्याय ‘वस्त्रविक्रयः’ में से अवतरित है। यह अध्याय महामहोपाध्याय पं० मथुराप्रसाद दीक्षितकृत ‘भारतविजयनाटकम्’ के प्रथम अंक से संकलित है। प्रस्तुत पाठ में वस्त्र व्यापारियों के साथ जुलाहों का वस्त्र-विक्रय हेतु वार्तालाप होता है। उसी समय विदेशी गौराङ्ग का प्रवेश होता है। वह राजकीय मुद्रा से अंकित प्रमाण पत्र दिखाकर बहुत कम मूल्य देकर वस्त्र खरीदना चाहता है। इतने कम मूल्य से उसके परिवार का पालन-पोषण भी नहीं हो पाएगा – ऐसा कहने पर जुलाहे के प्रति क्रोध करता हुआ वह विदेशी गौराङ्ग कहता है-

अर्थ – तुम्हारे परिवार की रक्षा की मैंने प्रतिज्ञा नहीं की। कैसे रक्षा होगी – यह तुम जानो, अब जाओ।

व्याख्या – इस प्रकार बहुत कम मूल्य देकर और साथ ही क्रोध भी दिखाकर वह विदेशी जुलाहे को वहाँ से जाने को कहता है। गरीबों के साथ इसी प्रकार से अन्याय होता है। उन्हें अपनी वस्तु कम कीमत पर भी बेचनी पड़ती है तथा कुछ भी बोलने पर बुरा-भला भी सुनना पड़ता है।

shaalaa.com
वस्त्रविक्रय:
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: वस्त्रविक्रयः - अभ्यासः [पृष्ठ ५६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sanskrit - Bhaswati Class 11
पाठ 9 वस्त्रविक्रयः
अभ्यासः | Q 3. (क) | पृष्ठ ५६

संबंधित प्रश्‍न

अयं पाठः कस्मात् ग्रन्थात् सङ्कलितः कश्च तस्य प्रणेता?


 वैदेशिको गौराङ्गः किं संदर्य श्रेष्ठिनौ तन्तुवायञ्च भर्त्सयति?


तन्तुवायेन कथं पटः निष्पादितः?


यन्मया निश्चिीयते दीयते च तदेव मूल्यमिति कथनं कस्यास्ति?


तन्तुवायाः कीदृशस्य पटस्य निर्माणमकुर्वन्?


यूयं निर्मितान् पटान् मह्यं दत्त इति कः कान् प्रति कथयति?


गौराङ्गः तन्तुवायान् कथं निष्काशयति?


वैदेशिको गौराङ्गः तन्तुवायान् कया ताडयितुं भर्त्सयति?


कथमेतेन मम कुटुम्बस्य ______ भविष्यतः। 


अनिर्वचनीयम् ______ सौन्दर्यम्।


शोभनं पट निर्माय मह्यं ______ योग्यं ______ भविष्यति।


यूयं पटान् निर्माय ______ सविधे विक्रीणीध्वे।


सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्-

अनिर्वचनीयमेतत्पट्योः सौन्दर्यम्। अतिसूक्ष्मतरोऽयं पटः। पश्य,एतस्य पञ्चषैः पटलैः परिवेष्टितमप्यपटमेव प्रतीयतेऽङ्गम्।


सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्-

न वयमयोग्यमूल्यत्वात् पट निर्मामः।


सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-

विंशत्यधिकम् ।


सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-

मुद्राङ्कितम्।


सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-

विधेरुन्मूलम् ।


सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-

मोचयिष्याम्यतः।


सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-

सामर्षम्।


सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-

मिथ्यैतत् ।


‘एतत्सूक्ष्मपटस्येति’ श्लोकस्य स्वमातृभाषया अनुवादः कार्यः-


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×