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संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग क्या है? किसी निर्धारित समयावधि में संव्यवहार मूल्य से यह किसी प्रकार संबंधित है? - Economics (अर्थशास्त्र)

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प्रश्न

संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग क्या है? किसी निर्धारित समयावधि में संव्यवहार मूल्य से यह किसी प्रकार संबंधित है?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

मुद्रा की माँग संव्यवहार को पूरा करने के उद्देश्य से की जाती है तो इसे संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह गृहस्थों तथा फर्मों द्वारा अपने दिन-प्रतिदिन के लेन-देन के कार्यों के लिए की गई मुद्रा की माँग है। सौदों के लिए नकदी संचय की माँग इसीलिए होती है, क्योंकि मुद्रा की प्राप्ति और उसके व्यय में समय का अन्तर होता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी आये मासिक आधार पर प्राप्त करता है और मास के पहले दिन बिल का भुगतान करते हैं, तो हमें पूरे मास नकद राशि धारण करने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु ऐसा नहीं है लोग अलग-अलग समय पर आय प्राप्त करते हैं। उनका व्यय उस पूरे समयांतराल में लगातार होता रहता है। व्यक्ति एवं फर्मे कितनी मात्रा में नकदी का संचय करना चाहेंगे यह सौदों की कुल मात्रा पर निर्भर करता है। अर्थव्यवस्था में कुल सौदों की मात्रा राष्ट्रीय आय पर निर्भर करती है। सूत्र के रूप में

`"M"_"T"^"d"` = K. T.

`"M"_"T"^"d"` जहाँ  संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग

K = धनात्मक अंश
T = एक इकाई समयावधि में अर्थव्यवस्था में संव्यवहार का कुल मूल्य
एक इकाई समयावधि में अर्थव्यवस्था में संव्यवहार का कुल मूल्य राष्टीय आय तथा कीमत स्तर पर निर्धारित करता है अतः हम कह सकते है - 
`"M"_"T"^"d"` = kPy
जहाँ y  = वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद और P = सामान्य कीमत स्तर है

अतः किसी अर्थव्यवस्था में संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग का अर्थव्यवस्था की वास्तविक आय और उसके औसत कीमत स्तर के बीच धनात्मक संबंध होता है।

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मुद्रा की माँग और मुद्रा की पूर्ति
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पाठ 3: मुद्रा और बैंकिंग - अभ्यास [पृष्ठ ५३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Arthashastra Samisht Arthashastra ek Parichay [Hindi] Class 12
पाठ 3 मुद्रा और बैंकिंग
अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ५३
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