मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळSSC (Hindi Medium) इयत्ता ७ वी

।। संत न छाड़ें संतई ।।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

।। संत न छाड़ें संतई ।। 

सविस्तर उत्तर
Advertisements

उत्तर

एक गहरी और प्रेरणादायक कहावत है, जिसका अर्थ है कि संत अपनी संत प्रवृत्ति को कभी नहीं छोड़ते।

संत का स्वभाव करुणा, प्रेम, दया, सत्य और परोपकार से परिपूर्ण होता है। परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, एक सच्चा संत अपनी मूल प्रवृत्ति को कभी नहीं बदलता। वह सदैव दूसरों के हित में कार्य करता है, सत्य के मार्ग पर चलता है और लोककल्याण के लिए समर्पित रहता है।

यह कथन हमें यह सिखाता है कि हमें भी अपने अच्छे गुणों और नैतिक मूल्यों को कभी नहीं त्यागना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 21: पद - पाठ्य प्रश्न [पृष्ठ १]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 21 पद
पाठ्य प्रश्न | Q १. | पृष्ठ १
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×