हरिहर काका जीवन के अंतिम चरण में पहुँच चुके थे और वृद्धावस्था के कारण उनकी दृष्टि कमजोर हो गई थी। उनके पास पंद्रह बीघा भूमि थी, फिर भी वे दालान में अकेले पड़े रहते थे और उनकी सेवा करने वाला कोई नहीं था। इससे उनका भाइयों के परिवार से मोह भंग हो गया। महंत द्वारा ठाकुरबाड़ी में बंद किए जाने और पुलिस द्वारा छुड़ाए जाने के बाद उन्हें समझ आ गया कि सभी लोग उनकी संपत्ति के लालच में हैं। इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वे जीवनकाल में अपनी जायदाद किसी के नाम नहीं करेंगे। इससे यह सीख मिलती है कि यदि कोई निस्संतान वृद्ध व्यक्ति हो, तो उसे अपनी अचल संपत्ति किसी के नाम नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर उसका जीवन अत्यंत कष्टदायक हो सकता है।
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प्रश्न
संचयन पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए:
हरिहर काका को वृद्धावस्था में किन परेशानियों का सामना करना पड़ा? बुजुर्गों के खुशहाल जीवन के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
shaalaa.com
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
