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सभी विद्यार्थी ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें।

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प्रश्न

सभी विद्यार्थी ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें।

लेखन कौशल्य
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उत्तर

नुक्कड़ नाटक — पर्यावरण बचाओ

पात्र: पेड़, धरती माँ, मछली, राधा और मोहन (विद्यार्थी)
दृश्य: मोहन पेड़ की छाँव में बैठा है। तभी पेड़ बोल उठता है।
पेड़ (उदास होकर): ओ मानव! तुम मुझे बेवजह काट रहे हो। मैं तुम्हें छाया, फल और शुद्ध हवा देता हूँ, पर तुम चिड़ियों का घर भी उजाड़ देते हो!
मछली (पानी से निकलकर): मुझे तो गंदे पानी में साँस लेनी पड़ रही है। तुम नालों का कूड़ा और प्लास्टिक नदियों में फेंक देते हो।
धरती माँ: बेटा, वाहनों का धुआँ, प्लास्टिक के ढेर और शोर मुझे बीमार कर रहे हैं। मेरी हरियाली और नदियाँ मैली हो रही हैं।
राधा (सबको समझाते हुए): तो चलो, आज से हम सब मिलकर यह प्रण करें–
  1. अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ और उनकी देखभाल करें।
  2. कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में डालें।
  3. प्लास्टिक के थैले की जगह कपड़े, जूट या कागज़ के थैले इस्तेमाल करें।
  4. पानी और बिजली की बचत करें।
  5. पुरानी चीज़ों का दोबारा प्रयोग (रीसाइकल) करें।
मोहन: सही कहा, राधा! साफ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
सभी मिलकर नारे लगाते हैं:
  • पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ!
  • कूड़ा कूड़ेदान में डालो, हरा-भरा देश बनाओ!

इस नाटक का संदेश है कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब एक-दूसरे से जुड़े हैं। प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहना ही हमें सुखी बनाएगा, जैसा कवि ने ‘चिड़िया’ कविता में पक्षियों के माध्यम से सिखाया है। इस नाटक को विद्यार्थी मिलकर विद्यालय प्रांगण में प्रस्तुत कर सकते हैं।

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पाठ 9: चिड़िया - पाठ से आगे [पृष्ठ १२५]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
पाठ 9 चिड़िया
पाठ से आगे | Q (ख) | पृष्ठ १२५
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