मराठी

साक्षात्कार में से चुनकर एक वाक्य नीचे दिया गया है। इसे ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इसका क्या अर्थ समझ में आया? अपना विचार लिखिए। “कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

साक्षात्कार में से चुनकर एक वाक्य नीचे दिया गया है। इसे ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इसका क्या अर्थ समझ में आया? अपना विचार लिखिए।

“कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान।”

सविस्तर उत्तर
Advertisements

उत्तर

इस पंक्ति में बिरजू महाराज कथक नृत्य की सूक्ष्मता और कोमलता का वर्णन करते हैं। कथक में गर्दन को बहुत हल्के और धीरे से हिलाया जाता है ठीक उसी प्रकार जैसे दीये (चिराग) की लौ हवा में बिना किसी झटके के कोमलता से हिलती-काँपती है। लौ की चाल में एक अनोखी नाजुकता और सुंदरता होती है; उसी तरह कथक की हर भाव-भंगिमा में लालित्य और बारीक नियंत्रण होना चाहिए। इसी तरह उँगलियाँ भी बहुत धीरे हिलानी पड़ती हैं, जैसे घूँघट पकड़ना या उठाना हो। जरा जोर से हिली नहीं कि चाचा जी तुरंत टोकते थे ‘घूँघट उठा रहे हो या तंबू?’ इससे स्पष्ट है कि कथक में हर अंग की चाल पर नाजुक नियंत्रण और निरंतर अभ्यास से मिली दक्षता अनिवार्य है।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 8: बिरजू महाराज से साक्षात्कार - पाठ से [पृष्ठ १०६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
पाठ 8 बिरजू महाराज से साक्षात्कार
पाठ से | Q 3. | पृष्ठ १०६
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×