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साझेदार के प्रवेश पर संचित लाभ और हानि का लेखांकन व्यवहार क्या होगा? - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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प्रश्न

साझेदार के प्रवेश पर संचित लाभ और हानि का लेखांकन व्यवहार क्या होगा?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

नये साझेदार के प्रवेश से पूर्व फर्म में संचित लाभों तथा एकत्रित हानियाँ पर पुराने साझेदारों का अधिकार होता है। इन लाभों तथा हानियों को पुराने साझेदारों के पूँजी खातों में पुराने लाभ हानि विभाजन अनुपात में वितरित किया जाता है।

इस प्रकार, एक भागीदार के प्रवेश के समय, शेष राशि में मौजूद आरक्षित और संचित लाभ/हानि का संतुलन पुराने भागीदारों के पूंजी/चालू खातों में उनके पुराने लाभ-साझाकरण अनुपात में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

(i) निम्नलिखित रोजनामचा प्रविष्टि बनाई जाएगी:

लाभ और हानि खाता    ...नाम
सामान्य संचय खाता    ...नाम
कामगार मुआवजा कोष खाता    ...नाम     (दायित्व से अधिक आरक्षित)

आकस्मिक आरक्षित खाता    ...नाम    (पुस्तक मूल्य और बाजार मूल्य के बीच के अंतर पर आरक्षित की अधिकता)

पुराने साझेदारों की पूंजी खाता
(आरक्षित होने और संचित लाभ को अपने पुराने लाभ-साझाकरण अनुपात में पुराने भागीदारों कोहसहस्तांतरित)

(ii) इसी तरह, जब नुकसान को पुराने साझेदारों को हस्तांतरित करना होता है, तो निम्नलिखित प्रविष्टि की जाती है:

पुराने साझेदारों की राजधानी/वर्तमान खाता  ...नाम

          लाभ और हानि खाता   (डेबिट शेष)

           आस्थगित राजस्व व्यय खाता   (जैसे विज्ञापन व्यय)
(पुराने लाभ साझा अनुपात में पुराने भागीदारों को
हस्तांतरित संचित घाटा होने के नाते)

इन प्रविष्टियों का प्रभाव यह है कि आरक्षित और संचित लाभ/हानि का संतुलन अब बैलेंस शीट में दिखाई नहीं देगा।

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संचित लाभों और हानियों का समायोजन
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