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रेटिना पर प्रकाश द्वारा आवेग उत्पन्न होने की क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।

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प्रश्न

रेटिना पर प्रकाश द्वारा आवेग उत्पन्न होने की क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

रेटिना पर प्रकाश द्वारा आवेग उत्पन्न होने की क्रियाविधि - जब विशिष्ट तरंग दैर्ध्य वाली प्रकाश की किरणें रेटिना पर पड़ती हैं, तब ये शलाकाओं तथा शंकुओं में उपस्थित रसायनों में परिवर्तन करती हैं।

जब प्रकाश की किरणें शलाकाओं के रोडोप्सिन पर पड़ती हैं, तब वह रेटिनीन तथा ऑप्सिन में टूट जाता है। अंधकार में शलाकाओं में एंजाइम की सहायता से रेटिनीन तथा ऑप्सिन रोडोप्सिन को, संश्लेषण करते हैं। यही कारण है कि जब हम तीव्र प्रकाश से अंधकार में जाते। हैं, तब एकदम कुछ दिखाई नहीं देता किन्तु धीरे-धीरे स्पष्ट दिखाई देने लगता है।

शंकुओं में आयोडॉप्सिन उपस्थित होता है। इसको वर्णक घटक रेटिनीन तथा प्रोटीन घटक फोटोप्सीन होता है। शंकु तीन प्रारंभिक रंगों को ग्रहण करते हैं, जो लाल, नीला व हरा होते हैं। उन्हें तीन प्रकार के शंकुओं द्वारा विभिन्न मात्रा में उद्दीपन ग्रहण से अन्य रंगों का ज्ञान होता है। मनुष्य व दूसरे प्राइमेट्स में दोनों नेत्रों द्वारा एक ही प्रतिबिंब बनता है। ऐसी दृष्टि को द्विनेत्री दृष्टि कहते हैं।

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