मराठी

“रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।” (क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

“रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।”

(क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?

(ख) आपने अनुभव किया होगा कि इस कविता में परिस्थितिवश प्रत्येक पात्र एक अलग भाव का प्रतिनिधि बन जाता है। निम्नलिखित पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे-

  • परशुराम
  • राजा जनक
  • लक्ष्मण
  • राम
  • सभा में उपस्थित अन्य राजा
लघु उत्तर
Advertisements

उत्तर

(क) प्रचंड क्रोध का भाव होता। चेहरा तमतमाया हुआ होता।

(ख) परशुराम – प्रचंड क्रोध द्वारा।
राजा जनक – समझदारी और शांति द्वारा।
लक्ष्मण – उग्र चुनौती और ललकार द्वारा।
राम – बहुत विवेक और शांति द्वारा।
सभा में उपस्थित अन्य राजा-
उपहास और परिहास (हँसी ठिठोली) द्वारा।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद - अभ्यास [पृष्ठ १५९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
पाठ 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १५९
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×