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प्रश्न
'पूरक पाठ्य-पुस्तक' के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए:
'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में आई पंक्ति- 'इन पत्थरों को तोड़ती पहाड़िनों के हाथों में पड़े ठाठे, एक ही कहानी कह रहे थे' -के माध्यम से लेखिका क्या कहना चाहती है? उन श्रम-सुंदरियों के जीवन के बारे में अपने विचार भी लिखिए।
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उत्तर
'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में आई पंक्ति 'इन पत्थरों को तोड़ती पहाड़िनों के हाथों में पड़े ठाठे, एक ही कहानी कह रहे थे' के माध्यम से लेखिका उन पहाड़ी महिलाओं के कठिन जीवन और संघर्ष की ओर इशारा करती हैं। 'ठाठे' से तात्पर्य है उनके हाथों में कठोर श्रम के निशान, जो हर रोज उनके जीवन की चुनौतियों को दर्शाते हैं। पत्थरों को तोड़ने का काम केवल शारीरिक मेहनत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन की कठोर सच्चाई, उनके संघर्ष और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का प्रतीक है। ये ठाठे एक तरह से उनकी कठिन मेहनत और त्याग की कहानी बयान करते हैं।
लेखिका ने उन श्रम सुंदरियों के जीवन के बारे में मेरे विचार यह हैं कि ये महिलाएँ अत्यधिक मेहनत और कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को आगे बढ़ाती हैं। उनका जीवन शारीरिक श्रम और चुनौतियों से भरा हुआ है, लेकिन उनमें अद्भुत धैर्य और सहनशीलता है। वे न केवल अपने परिवार की देखभाल करती हैं, बल्कि कठिन श्रम करके परिवार की आजीविका में भी योगदान देती हैं। उनकी यह संघर्षशीलता और जीवन के प्रति समर्पण हम सबके लिए प्रेरणादायक है।
