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प्रश्न
लगभग 80-100 शब्दों में उत्तर लिखिए:
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ में गांधीजी के संदर्भ में दो प्रकार के सोने की चर्चा क्यों की गई है और कैसे कहा जा सकता है कि गाँधीजी गिन्नी का सोना थे? अपना तर्कसंगत मत व्यक्त कीजिए।
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उत्तर
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ में गाँधी जी को दो प्रकार का सोना बताया गया है: शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना। शुद्ध सोना पूरी तरह से शुद्ध होता है, लेकिन गिन्नी का सोना मिश्रित होता है, इसलिए यह आभूषण आदि बनाने में सबसे अच्छा है क्योंकि यह लचीला और मजबूत होता है। गाँधी जी भी गिन्नी की तरह सोते थे। व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर तक पहुंचाने के लिए आदर्श रूपी शुद्ध सोने को व्यावहारिकता रूपी तांबे में मिलाया गया था। वे ताँबे में सोना नहीं, बल्कि सोने में ताँबा मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। शुद्ध सोना यहाँ आदर्श और ताँबा व्यवहार का प्रतीक है। वे व्यवहार को आदर्श बनाकर चलाते थे। आदर्श गिरने नहीं दिए गए। यही कारण है कि उन्हें अक्सर “प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट” कहा जाता है।
