मराठी

प्रोपीन पर HBr के संकलन से 2-ब्रोमोप्रोपेन बनता है, जबकि बेन्जॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में यह अभिक्रिया 1-ब्रोमोप्रोपेन देती है। क्रियाविधि की सहायता से इसका कारण स्पष्ट कीजिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

प्रोपीन पर HBr के संकलन से 2-ब्रोमोप्रोपेन बनता है, जबकि बेन्जॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में यह अभिक्रिया 1-ब्रोमोप्रोपेन देती है। क्रियाविधि की सहायता से इसका कारण स्पष्ट कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

प्रोपीन पर HBr का योग आयनिक इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया है जो मारकोनीकॉफ नियमानुसार होती है। इस अभिक्रिया में सर्वप्रथम H जुड़कर 2° कार्बोधनायन देता है। इस कार्योधनायन पर नाभिकस्नेही Br- आयन को शीघ्रता से आक्रमण होता है तथा 2-ब्रोमोप्रोपेन प्राप्त होती है।

बेन्जॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में अभिक्रिया मुक्त मूलक क्रियाविधि के अनुसार होती है। इस अभिक्रिया में Br मुक्त मुलक इलेक्ट्रॉनस्नेहीं के रूप में कार्य करता है जो बेन्जॉयल परॉक्साइड की HBr से क्रिया द्वारा प्राप्त होता है।

मुक्त मूलक प्रोपीन पर इस प्रकार क्रिया करता है कि अधिक स्थायी द्वितीयक (2°) मुक्त मूलक की उत्पत्ति हो सके। यह 2° मूलक HBr से एक H-परमाणु ग्रहण कर 1-ब्रोमोप्रोपेन देता है।

shaalaa.com
एल्काइन - एल्काइन के गुणधर्म
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: हाइड्रोकार्बन - अभ्यास [पृष्ठ ४०५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
पाठ 9 हाइड्रोकार्बन
अभ्यास | Q 13.16 | पृष्ठ ४०५
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×