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प्रच्छन्न और मौसमी बेराज़गारी में क्या अंतर है? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

प्रच्छन्न और मौसमी बेरोज़गारी में क्या अंतर है?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

  • प्रच्छन्न बेरोज़गारी: प्रच्छन्न बेरोज़गारी में लोग नियोजित प्रतीत होते हैं जबकि वास्तव में वे उत्पादकता में कोई योगदान नहीं कर रहे होते हैं। ऐसा प्रायः किसी क्रिया से जुड़े परिवारों के सदस्यों के साथ होता है। काम में पाँच लोगों की आवश्यकता है किंतु उसमें आठ लोग लगे हुए हैं, जहाँ 3 लोग अतिरिक्त हैं। यदि इन 3 लोगों को हटा लिया जाए तो भी उत्पादकता कम नहीं होगी। ये 3 लोग प्रच्छन्न बेरोजगारी में शामिल हैं।
  • मौसमी बेरोज़गारी: मौसमी बेरोज़गारी तब होती है जब वर्ष के कुछ महीनों के दौरान लोग रोज़गार नहीं खोज पाते। भारत में कृषि कोई पूर्णकालिक रोज़गार नहीं है। यह मौसमी है। इस प्रकार की बेरोज़गारी कृषि में पाई जाती है। कुछ व्यस्त मौसम होते हैं जब बिजाई, कटाई, निराई और गहाई की जाती है। कुछ विशेष महीनों में कृषि पर आश्रित लोगों को अधिक काम नहीं मिल पाता।
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बेरोज़गारी
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2: संसाधन के रूप में लोग - अभ्यास [पृष्ठ २७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Social Science - Economics [Hindi] Class 9
पाठ 2 संसाधन के रूप में लोग
अभ्यास | Q 10. | पृष्ठ २७
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