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प्रश्न
प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधानों का अधिक उपभोग कैसे हुआ है?
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उत्तर
प्रौद्योगिकी तथा आर्थिक विकास में विषमता के कारण काफी संसाधन कुछ लोगों के हाथ में केंद्रित हो गए हैं जिससे संसार संसाधन संपन्न तथा संसाधन हीन वर्गों में बंट गया है। अपने लालच में स्वार्थ के चलते भी कुछ लोगों द्वारा अधिक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से विकसित देश संसाधनों के शोषण तथा उपयोग में पिछले तथा अविकसित देशों के मुकाबले आगे हैं। उपनिवेशन का इतिहास भी बताता है कि किस तरह शक्तिशाली साधन संपन्न देशों ने दुनिया के विभिन्न राष्ट्रों को गुलाम बना के वहां के संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया। तकनीकी तथा आर्थिक रूप से शक्तिशाली समाज सर्वत्र संसाधनों के दुरुपयोग में आगे दिखाई देता है। संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को देखते हुए ही महात्मा गांधी ने भी चिंता व्यक्त की थी। उनके शब्दों में-”हमारे पास पेट भरने को बहुत कुछ है लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं।”
विश्व स्तर पर संसाधनों के शोषण के लिए लालची और स्वार्थी मानसिकता उत्तरदायी है और प्रौद्योगिकी की आसानी से उपलब्धता ने इसे बढ़ावा दिया है। यदि कुछ ही व्यक्तियों तथा देशों द्वारा संसाधनों का वर्तमान दोहन जारी रहता है तो हमारी पृथ्वी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।भावी पीढ़ी के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए तथा सतत पोषणीयता को बढ़ावा मिले। हर तरह के जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए संसाधनों के उपयोग की योजना बनाना अति आवश्यक है।
