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प्रश्न
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्ति नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
“बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”
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उत्तर
इस कुंडली में कवि गिरिधर कविराय कहते हैं कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम करता है, वह बाद में बहुत पछताता है। ऐसा आदमी अपना ही काम बिगाड़ लेता है और लोग उसका मज़ाक उड़ाते हैं। आगे कवि कहता है कि जिसका सबके सामने मज़ाक उड़ता है, उसके मन को चैन नहीं मिलता। खान-पान, सम्मान और राग-रंग कुछ भी अच्छा नहीं लगता। बिना विचारे (बिना सोचे) किए गए काम का दुःख दूर नहीं होता, वह हमेशा दिल में खटकता रहता है।
सीख: हर काम करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए। बिना सोचे किया गया काम अपना ही नुकसान कराता है और हमें समाज में हँसी का पात्र बना देता है। चित्र में भी यही बात दिखाई गई है कि जो व्यक्ति उसी डाल को काटता है जिस पर वह खुद बैठा है, वह बिना सोचे काम करके अपना ही नुकसान कर रहा है।
