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प्रश्न
ओ चराचर! मत चूक अवसर - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
यह पंक्ति अक्कमहादेवी अपने प्रथम वचन में उस समय कहती हैं जब वे अपने समस्त विकारों को शांत हो जाने के लिए। कह चुकी हैं। इसका आशय है कि इंद्रियों के सुख के लिए भाग-दौड़ बंद करने के पश्चात् ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सरल हो जाता है। अतः चराचर (जड़-चेतन) को संबोधित कर कहती हैं कि तू इस मौके को मत खोना। विकारों की शांति के पश्चात् ईश्वर प्राप्ति का अवसर तुम्हारे हाथ में है, इसका सदुपयोग करो।
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हे भूख! मत मचल
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
