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प्रश्न
नवयुवकों की शक्ति देशहित में लगनी चाहिए।
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उत्तर
मनुष्य के अंदर उसके पूरे जीवन में सबसे अधिक ऊर्जा युवावस्था में होती है। इस उम्र में वह अधिक-से-अधिक मुश्किल कार्य कर सकता है। मनुष्य का कर्तव्य होता है कि वह अपने परिवार और समाज के साथ-साथ देश के विकास के लिए भी कार्य करे। अत: नवयुवक या युवावर्ग को अपनी शक्ति देशहित में लगानी चाहिए, जिससे देश ज्यादा-से-ज्यादा सफलता प्राप्त कर सके।
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| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
