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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए -
भाग्य और पुरुषार्थ
- आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
- भाग्यवादी व्यक्ति उदासीन रहता है।
- परिश्रमी व्यक्ति अपने भाग्य को बदल लेता है।
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उत्तर
भाग्य और पुरुषार्थ
आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जबकि कुछ लोग भाग्यवादी होकर उदासीन रहते हैं, दूसरे समझते हैं कि भाग्य के साथ सामर्थ्य भी मिलना आवश्यक है। परिश्रमी व्यक्ति जानता है कि वह अपने कर्तव्यों को निरंतर निभाकर भाग्य को अपने पक्ष में कर सकता है।
जीवन में सफलता के लिए पुरुषार्थ अत्यंत महत्वपूर्ण है। कठिनाइयों से भी लड़ने वाले, समय का सदुपयोग करने वाले और अपने लक्ष्यों के प्रति पक्का संकल्प रखने वाले व्यक्ति भाग्यशाली होते हैं। वे अपने काम को समय पर पूरा करते हैं और निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर रहते हैं।
इसलिए, भाग्य और पुरुषार्थ दोनों का संतुलन रखना महत्वपूर्ण है। अवसर प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ बढ़ाना और संघर्ष करना अपने भाग्य को सुधार सकता है। इसलिए, हमें भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय पुरुषार्थपूर्वक जीवन को जीने का प्रयास करना चाहिए।
Notes
- विषयवस्तु - 3 अंक
- भाषा - 1 अंक
- प्रस्तुति - 2 अंक
