वे लोग धन्य होते हैं जो समस्त चराचर जगत को अपना स्वामी मानते हैं और स्वयं को सबका सेवक समझते हैं। सनातन संस्कृति में पर्वत, वृक्ष, नदियाँ, पृथ्वी, वायु, जल, सभी प्राणी और मनुष्य किसी न किसी रूप में पूजनीय माने गए हैं, इसलिए उनकी पूजा और सेवा की जाती है। जो व्यक्ति इस भाव से जीवन जीता है, वही महामानव बन जाता है और बाद में संसार उसकी पूजा करता है। कोई पर्यावरण को शुद्ध करने के प्रयासों से मानवता की सेवा करता है, तो कोई वैज्ञानिक बनकर अपने नए आविष्कारों के माध्यम से समाज का कल्याण करता है। कोई विद्यालय, अस्पताल आदि की स्थापना करके सेवा भावना प्रकट करता है, तो कोई मानव कल्याण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाकर अमर हो जाता है। अतः सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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एक कदम चलते हैं, और चल के ठहर जाते हैं, हम तो अब वक्त की आहट से भी डर जाते हैं। जो भी इस आग के दरिया में उतर जाते हैं, वही तपते हुए सोने-से निखर जाते हैं। भीड़ के साथ चले हैं, वो उधर जाते हैं, हम तो खुद राह बनाते हैं, इधर जाते हैं। मेरी कश्ती का खिवैया है, मुहाफिज तू है, कितने आते हैं यहाँ, कितने भँवर जाते हैं। जब भी आते हैं मेरी आँख में आँसू ‘बेदिल’, जख्म सीने के मेरे, और निखर जाते हैं। |
- उत्तर लिखिए: 2
- डर जाते हैं - ...........
- उतर जाते हैं - ...........
- निखर जाते हैं - ...........
- बनाते हैं - ...........
- ‘सेवा परमोधर्म’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2
आकलन
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उत्तर
- डर जाते हैं - वक्त की आहट से
- उतर जाते हैं - आग के दरिया में
- निखर जाते हैं - सोने-से
- बनाते हैं - राह
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shaalaa.com
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2024-2025 (July) Official Board Paper
