मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागें अति दूर।। सिष को ऐसा चाहिए, गुरु को सब कुछ

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागें अति दूर।।

सिष को ऐसा चाहिए, गुरु को सब कुछ देय। 
गुरु को ऐसा चाहिए, सिष से कुछ नहिं लेय।।

कबिरा संगत साधु की, ज्यों गंधी की बास। 
जो कुछ गंधी दे नहीं, तौ भी बास सुबास।।

दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय।
बिना जीव की स्वाँस से, लोह भसम हवे जाय।।

  1. उचित जोड़ियाँ मिलाइए:    (2)
      उत्तर
    (i) गुरु ----------------- खजूर
    (ii) पेड़ ----------------- जीव
    (iii) साधु ----------------- सिष
    (iv) स्वाँस ----------------- संगत
          बास
  2. प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।    (2)
आकलन
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उत्तर


  1.   उत्तर
    (i) गुरु सिष खजूर
    (ii) पेड़ खजूर जीव
    (iii) साधु संगत सिष
    (iv) स्वाँस जीव संगत
          बास
  2. संत कबीर का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति धन या विद्या के कारण बड़ा बन जाता है, तो उसमें दूसरों की भलाई करने का गुण भी होना चाहिए। केवल ऊँचाई प्राप्त करना ही बड़ा होना नहीं है। अगर वह किसी के काम नहीं आता, तो उसका बड़ा होना बेकार है जैसे खजूर का पेड़ जो ऊँचा तो होता है, लेकिन उसकी छाया किसी को नहीं मिलती और फल भी इतने ऊँचाई पर होते हैं कि उन्हें पाना मुश्किल होता है। 
    गुरु और शिष्य के संबंध पर कबीर कहते हैं कि शिष्य को अपने गुरु के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण दिखाना चाहिए। उसे अपना अहंकार छोड़कर गुरु को सर्वोपरि मानना चाहिए। वहीं गुरु का कर्तव्य है कि वह अपने शिष्य को सच्चा मार्ग दिखाए, उसे योग्य बनाए, और बदले में किसी प्रकार की अपेक्षा न रखे।
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