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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
| सेस, गनेस, महेस, दिनेस, सुरेसहु, जाहिं निरतर गावैं। जाहिं अनादि, अनंत, अखंड, अछेद, अभेद, सुबेद बतावैं।। नारद से सुक व्यास रटें, पचिहारे तऊ मुनि पार न पावैं।। ताहिं अहीर की छोहरियाँ, छछ्ठिया भरि छाछ पै नाच नचावैं।। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए- (2)

(2) अंतिम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
थोडक्यात उत्तर
तक्ता
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उत्तर
(1)

(2) प्रस्तुत सवैया 'रसखान' द्वारा रचित 'अति सोहत स्याम जू' से ली गयी हैं। कृष्ण भक्ति का वर्णन करते हुए सबैयाकार कहते हैं कि जिसश्री कृष्ण जी का नाम ब्रह्म ऋषि नारद, सुखदेव व महाकवि व्यास जैसे तपस्वी जिनके नाम को निरंतर रटते रहते हैं और प्रयत्न करने के बावजूद भी उनका पार नहीं पा सके, ऐसे कृष्ण को अहीर कन्याएँ (ग्वालिने) कटोरे भर छाछ के लिए नाच नचाती हैं।
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अति सोहत स्याम जू
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
