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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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राजेंद्र बाबू की वेशभूषा की ग्रामीणता तो और भी दृष्टि को उलझा लेती थी। खादी की मोटी धोती ऐसा फेंटा देकर बाँधी गई थी कि एक ओर दाहिने पैर पर घुटना छूती थी और दूसरी ओर बाएँ पैर की पिंडली। मोटे, खुरदुरे, काले बंद गले के कोट में ऊपर का भाग, बटन टूट जाने के कारण खुला था और घुटने के नीचे का बटनों से बंद था। सर्दी के दिनों के कारण पैरों में मोजे जूते तो थे, परंतु कोट और धोती के समान उनमें भी विचित्र स्वच्छंदतावाद था। मिट्टी की परत से न जूतों के रंग का पता चलता था, न रूप का। गांधी टोपी की स्थिति तो और भी विचित्र थी। उसकी आगे की नोक बाई भौंह पर खिसक आई थी और टोपी की कोर माथे पर पट्टी की तरह लिपटी हुई थी। देखकर लगता था मानों वे किसी हड़बड़ी में चलते-चलते कपडे पहनते आए हैं, अत: जो जहाँ जिस स्थिति में अटक गया, वह वहीं उसी स्थिति में लटका रह गया। |
(1) कारण लिखिए: 2
- राजेंद्र बाबू के बंद गले के कोट में ऊपर का भाग खुला था - .......
- राजेंद्र बाबू के पैरों में मोजे-जूते थे - .......
(2) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: 2
(i) विलोम शब्द की जोड़ी -
....... × .......
(ii) प्रत्यययुक्त शब्द -
- .......
- .......
(3) ‘आकर्षक व्यक्तित्व में वेशभूषा का महत्त्व’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 2
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उत्तर
(1)
- राजेंद्र बाबू के बंद गले के कोट में ऊपर का भाग खुला था - मोटे, खुरदुरे, काले बंद गले के कोट में ऊपर का भाग, बटन टूट जाने के कारण खुला था।
- राजेंद्र बाबू के पैरों में मोजे-जूते थे - सर्दी के दिनों के कारण
(2)
(i) दाएँ × बाएँ
(ii)
- स्थिति
- हड़बड़ी
(3)
वेशभूषा व्यक्तित्व का दर्पण है, जो प्रथम प्रभाव डालती है। स्वच्छ और उचित पहनावा आत्मविश्वास बढ़ाता है और दूसरों के प्रति सम्मान दर्शाता है, हालांकि, असली आकर्षक व्यक्तित्व सादगी और विचारों की स्पष्टता से बनता है।
